बाल कविता : नई पहचान




डॉ.प्रमोद सोनवानी
"
पुष्प

"

नित्य सवेरे तुम जग जाना,
धरती मां को शीश नवाना ।
प्यारे बच्चों इस दुनिया में,
मिल-जुलकर पहचान बनाना।

मात-पिता की सेवा करना,
बाधाओं से कभी न डरना ।
पढ़-लिखकर जीवन में अपने,
मिल-जुलकर पहचान बनाना।

सच्चाई के पथ पर चलना,
भेद-भाव की बात न करना।
अपनी मंजिल तक जाकर तुम,
मिल-जुलकर पहचान बनाना।

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :