मैं सेक्स चाहता हूं और 74 हत्याएं करूंगा...

जर्मनी के कोलोन शहर में एक स्थान पर लिखा मिलता है 'मैं चाहता हूं और मैं 74 लोगों की हत्याएं करूंगा।' अपने शब्दों और कर्मों से इस्लामी और गैर-इस्लामी देशों के मुस्लिम यह सोचते हैं कि गैर-इस्लामी महिलाएं 'गंदी और काफिर' होती हैं। ये केवल इसलिए पैदा हुई हैं कि वे मुस्लिमों की यौन वासना को शांत करें।
 
पहले, अल्लाह के नाम पर जिहाद करने वाले उन कट्‍टरपंथी लड़ाकों के बारे में सोचें जो यह मानते हैं कि वे यह सब अल्लाह की खातिर कर रहे हैं। इस्लामिक स्टेट जैसे क्षेत्रों लड़ाकों के कामों और विश्वासों के बारे में जान लें।  
 
इस्लामिक स्टेट के एक स्थान पर एक बारह वर्षीय गैर-मुस्लिम (यजीदी) लड़की से बलात्कार करने से पहले एक लड़ाके ने लड़की को समझाया कि वह जो करने वाला है, वह पाप नहीं है। क्योंकि कुरान में न केवल इस बात की इजाजत दी गई है कि किशोरावस्था से भी कम उम्र की लड़कियों के साथ कोई भी ‍मुस्लिम बलात्कार कर सकता है। उसका कहना था कि कुरान न केवल उसे ऐसे किसी पाप से बचाती है वरन इसके लिए प्रेरित भी करती है। इसके बाद उसने लड़की हाथों को बांध दिया और उसका मुंह बंद कर दिया।
 
इसके बाद वह ‍बिस्तर की बगल में नमाज पढ़ने लगा और नमाज पूरी होते ही उसके शरीर को रौंदने लगा। यह लड़की इतनी छोटी थी कि कोई भी वयस्क उसकी कमर को अपने दोनों हाथों में भर सकता था। जब उसका बलात्कार का काम पूरा हो गया वह फिर नमाज पढ़ने लगा। इस बीच लड़की चिल्लाती रही कि उसे बहुत तकलीफ हो रही है, इस काम को रोक दे। लेकिन फिर एक बार अपनी धार्मिक भक्ति करने के बाद फिर उसी काम में लग गया।
 
उसने लडकी को समझाया, 'का मानना है कि वह इस्लाम न मानने वाली किसी भी काफिर औरत या लड़की से बलात्कार कर सकता है। उसका कहना था कि वह जितना अधिक उससे बलात्कार करेगा, वह उतना ही अल्लाह के करीब पहुंच जाएगा।
 
इस तरह का व्यवहार केवल कट्‍टरपंथी जिहादियों तक ही सीमित नहीं है जिनका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है लेकिन ज्यादातर मूर्ख और मक्कार किस्म के लोग बार-बार यही बात कहते हैं। यह बात पूरी तरह से इस्लामी संस्कृति में बैठ गई है और जड़ें जमा चुकी है। 
सेक्स से इन्कार किया तो कार चढ़ा दी... पढ़ें अगले पेज पर पाकिस्तान की हकीकत....

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