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बाबरी विध्वंस फैसला : पाकिस्तान में मिश्रित प्रतिक्रिया

Last Updated: गुरुवार, 20 अप्रैल 2017 (19:12 IST)

इस्लामाबाद। बाबरी मस्जिद विध्वंस पर सुप्रीम कोर्ट के बुधवार को आए फैसले की पाकिस्तानी समाचार पत्रों में खासी प्रतिक्रिया हुई है। डॉन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बाबरी मस्जिद को ढहाने की कार्रवाई पूर्व नियोजित थी और इसमें भाजपा, संघ परिवार और हिंदूवादी संगठनों के नेता शामिल रहे हैं। इस रिपोर्ट में कोबरापोस्ट की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है।
 
हालांकि दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुस्लिमों के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त है लेकिन ज्यादातर लोगों का कहना है कि उन्हें इस मुद्दे की भलीभांति जानकारी नहीं है, इसलिए वे इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते हैं। इस्लामाबाद की इकरा यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि इस मामले की पाकिस्तान के लिए कोई प्रासंगिकता नहीं है क्योंकि आखिरकार यह भारत का अंदरुनी मामला है।
 
कुछ लोगों ने जहां इस फैसले को मुस्लिमों के खिलाफ बताया तो कुछ लोगों ने भारतीय  न्यायपालिका की सराहना की। एक प्रसिद्ध टीवी एंकर शामून हाशमी ने कोर्ट के फैसले की प्रशंसा की और कहा कि लोगों ने इस घटना के बाद पेशावर में एक परिसर में मस्जिद और चर्च बनाए थे। एक छात्र ने इस फैसले को 'धर्मनिरपेक्षता' का उदाहरण बताया और एक लेखक तथा बुद्धिजीवी हैरिस खालिक ने कहा कि यह फैसला बिलकुल सही है क्योंकि 40 के दशक में अवध के इस स्थान को मस्जिद ए जन्म स्थान कहा जाता था। उन्होंने कहा कि यह बात सिद्ध करती है ‍कि अयोध्या के मुस्लिमों ने स्थान की पवित्रता का हमेशा ख्याल रखा।
 
हैदराबाद, सिंध से प्रकाशित सियासत डॉट कॉम ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के 'लिप्त' होने का फैसला सुनाया है। इसी तरह द न्यूज डॉट कॉम पाकिस्तान ने लिखा है कि बाबरी मस्जिद ढहाने का षड्यंत्र रचने में शामिल होने पर उन पर मुकदमा चलाने का फैसला सुनाया है, लेकिन समाचार पत्रों में बहुत सीमित और संक्षिप्त प्रतिक्रिया देने के अलावा ज्यादातर लोगों का मानना था कि यह भारत का अंदरुनी मामला है और चूंकि इस मामले को 25 वर्ष से ज्यादा बीत चुके हैं इसलिए नई पीढ़ी को यह मुद्दा आंदोलित नहीं करता है।
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