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जेटली ने अमेरिकी मंत्री के सामने उठाया H1B वीजा का मामला

वॉशिंगटन| Last Updated: शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017 (12:53 IST)
वॉशिंगटन। अत्यधिक कुशल भारतीय पेशेवरों की अमेरिका में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री बिल्बर रॉस के सामने एच-1 बी वीजा का मुद्दा  जोर देकर उठाया। ट्रंप प्रशासन के दौरान पहली बार मंत्रिमंडलीय स्तर की बातचीत में समझा जाता है कि रॉस से कहा गया है कि अमेरिका ने एच-1 बी वीजा से जुड़े मुद्दों की प्रक्रिया की समीक्षा करना शुरू कर दिया है। हालांकि इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
 
सूत्रों का कहना है कि भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों के मामले को उठाते हुए जेटली ने रॉस से कहा कि भारत और अमेरिका के आर्थिक विकास में इन अत्यधिक कुशल भारतीयों ने बहुत योगदान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें वही करना चाहिए जो कि दोनों देशों के हितों में हो। एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि समझा जाता है कि समीक्षा प्रक्रिया का कुछ भी निष्कर्ष हो, ट्रम्प प्रशासन का प्रशासनिक उद्देश्य योग्यता आधारित अप्रवास नीति होना चाहिए जोकि दोनों देशों के हित में हो।
 
इस सप्ताह ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित जारी प्रशासनिक आदेश में विदेश, श्रम, होमलैंड सिक्यूरिटी और न्याय विभाग से एच-1 बी वीजा नीति की समीक्षा करने को कहा गया है। जेटली एक भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर रहे हैं जोकि गुरुवार सुबह को वाशिंगटन डीसी में पहुंचा जोकि आईएमएफ और विश्व बैंक की ग्रीष्मकालीन बैठकों में भाग लेंगे।
 
सूत्रों के अनुसार, ऐसा समझा जाता है कि यहां बैठक के दौरान रोस ने कहा कि अमेरिका ने एच-1बी वीजा मामले की समीक्षा शुरू की है और इस पर अबतक कोई फैसला नहीं हुआ है। ट्रंप प्रशासन के अंतर्गत दोनों देशों के बीच पहली कैबिनेट मंत्री स्तर की वार्ता है।
 
एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों तथा पेशेवरों के मामले को उठाते हुए जेटली ने रोस से अमेरिका तथा भारत के आर्थिक विकास में अत्यधिक कुशल भारतीयों के योगदान के बारे में बताया और जोर दिया के यह बना रहना चाहिए जो दोनों देशों के हित में है।
 
ऐसा माना जा रहा है कि रोस ने कहा कि समीक्षा प्रक्रिया के जो भी नतीजा आएगा, ट्रंप प्रशासन का गुण आधारित आव्रजन नीति का लक्ष्य है जो उच्च दक्ष पेशेवरों को तरजीह दे।
 
ट्रंप ने इस सप्ताह सरकारी आदेश पर दस्तखत किए जिसमें विदेश, श्रम, आतंविका सुरक्षा एवं न्याय विभागें द्वारा एच-1बी वीजा क समीक्षा बात ही गई है।

दरअसल, अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी को दूर करने के लिए H-1B के नियमों को सख्त बनाने  की बात कही जाती रही है। आरोप है कि कई कंपनियां दूसरे देशों से कम सैलरी पर वर्कर  अमेरिका लाती हैं। इससे अमेरिकियों को नौकरी मिलने के मौके कम हो जाते हैं और बेरोजगारी  बढ़ती है। ट्रम्प प्रशासन के एक अफसर का कहना है कि हमारे देश में भी क्वॉलिफाइड  प्रोफेशनल्स हैं, जो कंपनियों की जरूरत पूरी कर सकते हैं। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही ट्रम्प  एडमिनिस्ट्रेशन ने एक पॉलिसी मेमोरेंडम जारी किया था। इसमें कहा गया था कि कम्प्‍यूटर  प्रोग्रामर्स H-1B वीजा पाने के योग्य नहीं होंगे।

जेटली अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष तथा विश्वबैंक की सालाना गृष्मकालीन बैठक में भाग लेने के लिये प्रतिनधिमंडल के साथ यहां आए हुए हैं।
 
अगले दो दिन वित्त मंत्री का अमेरिका, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, इंडोनेशिया तथा स्वीडन के वित्त मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने का कार्यक्रम है। वह पड़ोसी देश बांग्लादेश और श्रीलंका के वित्त मंत्रियों से भी मिल सकते हैं।
 
वाणिज्य मंत्री के साथ बैठक में वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों ने वषरें में मजबूत रणनीतिक, आर्थिक एवं रक्षा संबंध विकसित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों को दोनों देशों में द्विपक्षीय आधार पर पूरा समर्थन है।
 
अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के फोन पर तीन बार बातचीत के बाद अधिकारियों की बैठक से पता चलता है कि दोनों सरकार आने वाले साल में रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाने जा रही हैं।
 
बैठक के दौरान ऐसा समझा जाता है कि जेटली ने भारत की वृद्धि के बारे में जानकारी दी और मोदी सरकार के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) समेत नोटबंदी के बाद उठाए गए सुधार कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। जेटली ने कहा कि दोनों देश अगले कुछ साल में द्विपक्षीय कारोबार को 500 अरब डालर सॉलाना पहुंचाने की दिशा में सक्षम होंगे।
 
आईएमएफ और विश्वबैंक की गृष्मकालीन बैठक के अलावा वित्त मंत्री के जी-20 विदेश मंत्रियों समेत अन्य बहुपक्षीय बैठकों में भी शामिल होना है।

 


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