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जानिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 30 अमूल्य विचार

राजश्री कासलीवाल|
* निर्मल अन्तःकरण को जो प्रतीत हो, वही सत्य है।
 

 
* चलिए सुबह का पहला काम ये करें कि इस दिन के लिए संकल्प करें कि मैं दुनिया में किसी से नहीं डरूंगा। नहीं, मैं केवल भगवान से डरूं। मैं किसी के प्रति बुरा भाव न रखूं। मैं किसी के अन्याय के समक्ष झुकूं नहीं। मैं असत्य को सत्य से जीतूं और असत्य का विरोध करते हुए मैं सभी कष्टों को सह सकूं।
 
* भूल करने में पाप तो है ही, परंतु उसे छुपाने में उससे भी बड़ा पाप है।
 
* भविष्य में क्या होगा, मैं यह नहीं सोचना चाहता। मुझे वर्तमान की चिंता है। ईश्वर ने मुझे आने वाले क्षणों पर कोई नियंत्रण नहीं दिया है।
 
* मैं हिन्दी के जरिए प्रांतीय भाषाओं को दबाना नहीं चाहता, किंतु उनके साथ हिन्दी को भी मिला देना चाहता हूं।
 
* व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।
 
* काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है।
 
* गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती है। वह तो केवल अपनी खुशी बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है।
 
* हम जिसकी पूजा करते हैं, उसी के समान हो जाते हैं।
 
* श्रद्धा का अर्थ है आत्मविश्वास और आत्मविश्वास का अर्थ है ईश्वर में विश्वास।
 
 
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