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जानिए, भारत विभाजन के 10 बड़े कारण

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मुसलमानों के हक के लिए एक ओर जहां मुस्लिम लीग थी वहीं हिंदुओं में लोकप्रिय कांग्रेस ने सेकुलरिज्म का रास्ता अपना रखा था जिसके चलते हिंदू अधिकारों और हक की कोई बात नहीं करता था। कांग्रेस में आंबेडकर को जहां दलितों की चिंता थी वहीं सरदार पटेल जिन्नाह की चाल को समझ रहे थे और उन्हें अखंड भारत के धर्म के नाम पर खंड-खंड हो जाने का डर था।

इसके चलते सच्चे राष्ट्रवाद के दो फाड़ हो गए थे। एक वो जो कांग्रेस में रहकर हिंदुत्व की बात नहीं कर सकते थे और दूसरे वो जो खुलकर बात करते थे। उसके एक धड़े ने तो विभाजन के विचार को अपना समर्थन दिया, जबकि दूसरे ने उसका विरोध किया। जिन्होंने विभाजन का विरोध किया उन्हें कट्टर हिंदूवादी सोच का घोषित कर दिया गया।

जिन्होंने सक्रिय रूप से हिंदू अधिकारों की बात रखी और जिन्होंने विभाजन का खारिज किया वे कट्टर हिंदू कहलाए लेकिन उन्हें देश की जनता का समर्थन नहीं मिला। लेकिन इस तरह के लोगों की गतिविधियों के चलते मुस्लिमों और कट्टरता फैल गई।

ये हिंदू अखंड भारत का सपना देख रखे थे। इन पर यह आरोप है कि वर्तमान जनसंघ और हिन्दूवाद की विचित्र अहिन्दू भावना वाले उसके पुरखों ने देश का विभाजन करने में ब्रिटेन और मुस्लिम लीग की मदद की है। उन्होंने एक ही देश के अन्दर मुसलमान को हिन्दू के करीब लाने का कोई जरा-सा भी काम नहीं किया। इस तरह का अलगाव ही विभाजन की जड़ बना।

हिन्दू-मुस्लिम अलगाव को दूर न करना...



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