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जब लगती है बार-बार प्यास

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में शरीर का कम हो जाता है, वातावरण की गर्मी व धूप से वह तपने लगता है। ऐसे में बढ़ जाती है, बार-बार पानी पीने से भी प्यास शांत नहीं होती, ऐसे में निम्नलिखित प्रयोग करें-

पानी में शहद मिलाकर कुल्ला करने या लौंग को मुँह में रखकर चूसने से बार-बार लगने वाली प्यास शांत होती है।

अनन्नास का ऊपरी छिलका और भीतरी कठोर भाग निकाल कर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर, इन टुकड़ों को पानी में पकाकर नरम बनाएँ और फिर चीनी की चाशनी बनकर उसमें डाल दें। इस मुरब्बे का सेवन करने से प्यास बुझती है तथा शरीर की जलन शांत होती है, इससे हृदय को बल मिलता है।

गाय के दूध से बना दही 125 ग्राम, शकर 60 ग्राम, घी 5 ग्राम, शहद 3 ग्राम व काली मिर्च-इलायची चूर्ण 5-5 ग्राम लें। दही को अच्छी तरह मलकर उसमें अन्य पदार्थों को मिलाएँ और किसी स्टील या कलई वाले बर्तन में रख दें। उसमें से थोड़ा-थोड़ा दही सेवन करने से बार-बार लगने वाली प्यास शांत होती है।

जौ के भुने सत्तू को पानी में घोलकर, उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर पतला-पतला पीने से भी प्यास शांत होती है।

चावल के मांड में शहद मिलाकर पीने से भी तृष्णा रोग में आराम मिलता है।
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