कविता : बूढ़े होंगे हम...


विजय शर्मा

बूढ़े होंगे, बूढ़े होंगे हम,
एक न एक दिन कूड़े होंगे हम।
कोई न पूछेगा हमको,
कहेगा हमसे हो तुम कौन?

चलो करें कुछ ऐसा काम,
रहे जाने के बाद नाम।

कुछ बच्चों को रोज हसाएं,
उनको यह दुनिया दिखलाएं।

बतलाएं उनको दुनिया है गोल,
जो बोल सोच-समझ के बोल।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :