Widgets Magazine

छोड़ कर जगत के बंधन !




गोपाल बघेल 'मधु'
टोरोंटो, ओंटारियो, कनाडा
(मधुगीति १७०६२४ अ)
 
छोड़ कर के बंधन, परम गति ले के चल देंगे,
एक दिन धरा से फुरके, महत आयाम छू लेंगे !
 
देख सबको सकेंगे हम, हमें कोई न देखेंगे,
कर सके जो न हम रह कर, दूर जा कर वो कर देंगे !
सहज होंगे सरल होंगे, विहग वत विचरते होंगे, 
व्योम बन कभी व्यापेंगे, रोम में छिप कभी लेंगे !
 
चित्त हर चेतना देंगे, चितेरे हम रहे होंगे,
गोद हर सृष्टि कण ले के, वराभय कभी दे देंगे !
सुभग श्यामल सुहृद कोमल, हमारे आत्म-भव होंगे,
विदेही स्वदेही विचरित, प्रयोजन प्रभु 'मधु' होंगे !
Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
Widgets Magazine