हिन्दी कविता : रूह

से जब अलग हो जाएगा
Widgets Magazine
कैसे फिर इंसान रह जाएगा
छोड़ कर यह जहां चला जाएगा
रोता बिलखता छोड़ जाएगा

चलती-फिरती तेरी यह काया
मुट्ठी भर राख में सिमट जाएगी
बातें तेरी याद जमीन पर आएगी
परियों की कहानी सुनाई जाएगी

अकड़ सारी तेरी धूमिल हो कर
लाठी-सी तन कर रह जाएगी
बन तारा आसमां में चढ़ ऊपर को
संतति को राह हमेशा दिखाएगा
खूब कड़क बोल गूंजा करते थे
खूब दुंदुभि तेरी बजा करती थी
मान-सम्मान भी पाया तूने बहुत
अब मूक बन चल पड़ा यहां से
रूह ने देह में घुस रूह को लुभाया
संग संग प्रेम सरगम गुनगुनाया
टूटते दिल को बसंत से महकाया
अनजान को भी अपना बनाया

जीवन संग्राम में रूह फना हो जाए
मेरा मिल मुझसे बिछड़ जाएगा
आघात गहरा दे कर चला जाएगा
बरबस फिर बहुत याद आएगा

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।


Widgets Magazine

और भी पढ़ें :