विश्व पुस्तक मेले में कविता कुंभ का आयोजन

kavita kumbh

विश्व पुस्तक मेले में द्वारा 12 जनवरी 2018 को 'हिन्दी लेखक मंच' में 'कविता कुंभ' का आयोजन किया जा रहा है जिसमें सभी कवि अपनी कविता का पाठ करेंगे। 'कविता कुंभ' में शामिल होंगे वरिष्ठ कवयित्री अनामिका, वरिष्ठ कवि मदन कश्यप, युवा लेखिका ज्योति चावला, वरिष्ठ लेखिका सुनीता बुद्धिराजा, दलित लेखिका रजत रानी 'मीनू', कवि अरुण देव, वरिष्ठ कवि निलय उपाध्याय व कार्यक्रम का संचालन करेंगे प्रख्यात पत्रकार संजीव पालीवाल।
डॉ. अनामिका ने अब तक विपुल लेखन किया है जिनमें 8 कविता संग्रह, 5 कहानियां और आलोचना की कई पुस्तकें शामिल हैं। स्त्रीवादी विचारधारा से युक्त इनका स्वर और रचनाएं अंग्रेजी और हिन्दी के नवोदित लेखकों और कई पीढ़ियों के पाठकों को प्रेरित करती हैं। डॉ. अनामिका ने अनेक विख्यात कृतियों का अनुवाद किया है। डॉ. अनामिका अकादमिक रूप से दिल्ली में कार्यरत हैं और द्विभाषी लेखक के रूप में 20 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रचनाओं का प्रकाशन कर चुकी हैं।
वे एक प्रशिक्षित शास्त्रीय नृत्यांगना भी हैं। वर्तमान में वे दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेजी की प्राध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. अनामिका को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है जिनमें भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार, गिरिजा कुमार माथुर सम्मान, साहित्यकार सम्मान, परंपरा सम्मान और केदार सम्मान शामिल हैं। अनुवाद कार्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें जनवरी 2017 में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान जयपुर बुक मार्क के मंच से वाणी फाउंडेशन का 'डिस्टिंग्विश्ड ट्रांसलेटर अवॉर्ड' प्रदान किया जा चुका है।

'सात सुरों के बीच' की लेखिका सुनीता बुद्धिराजा को कविता, साक्षात्कार और यात्रा-वृत्तांत लिखना भी अच्छा लगता है। सबसे अच्छा लगता है पढ़ना और संगीत सुनना। सुनीता का व्यवसाय है जनसंपर्क। उनकी पुस्तकें प्रकाशित आधी-धूप, अनुत्तर तथा प्रश्न-पांचाली (तीनों कविता संकलन) काफी चर्चित हुई हैं। प्रश्न-पांचाली का मंचन-निर्देशन विख्यात रंग-निर्देशक दिनेश ठाकुर ने किया है। टीस का सफर साक्षात्कारों पर आधारित पुस्तक है जिसका अनुवाद तेलुगु में हो चुका है। सुनीता ने 4 कॉफी टेबल बुक्स का भी संपादन किया है जिनमें से 2 आंध्रप्रदेश, 1 कर्नाटक तथा 1 डॉ. विजय माल्या के संबंध में है।

रजत रानी 'मीनू' का जन्म शाहजहांपुर (उप्र) के जौराभूड़ नामक गांव में हुआ। उन्होंने एमफिल (नौवें दशक की हिन्दी दलित कविता पर अंबेडकर का प्रभाव), पीएचडी (हिन्दी दलित कथा-साहित्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से की है। उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं- हिन्दी दलित कविता, हिन्दी दलित कथा-साहित्य : अवधारणा और विधाएं (आलोचना), हम कौन हैं (कहानी संग्रह), हाशिए से बाहर (संपादित कहानी-संग्रह), अन्याय कोई परंपरा नहीं (सह-संपादन), पिता भी मां होते हैं (कविता संग्रह) 'नवें दशक की हिन्दी दलित कविता' पुस्तक पर मध्यप्रदेश दलित साहित्य अकादमी, उज्जैन द्वारा पुरस्कृत।

वरिष्ठ कवि मदन कश्यप का जन्म 29 मई 1954 को वैशाली (बिहार) में हुआ। उनकी कृतियां हैं- गूलर के फूल नहीं खिलते, लेकिन उदास है पृथ्वी, नीम रोशनी में, कुरुज, कवि ने कहा (चुनी हुई कविताएं) और दूर तक चुप्पी।

ज्योति चावला युवा लेखिका हैं। कविता और कहानी में समान रूप से लेखन। एक कविता संग्रह 'मां का जवान चेहरा' और एक कहानी संग्रह 'अंधेरे की कोई शक्ल नहीं होती' प्रकाशित। कविता की यह दूसरी किताब। कविताएं और कहानियां विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित। कहानी महत्वपूर्ण कहानी संकलनों में संकलित। कविता के लिए शीला सिद्धांतकर स्मृति सम्मान। सृजनात्मक साहित्य के अलावा अनुवाद के उत्तर-आधुनिक विमर्श में खास रुचि। इन दिनों कविताओं, कहानियों के अतिरिक्त इस विषय पर सक्रियता से लेखन। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली में अध्यापन।

कवि अरुण देव का जन्म 16 फरवरी 1972 को कुशीनगर, उत्तरप्रदेश में हुआ है। कवि, आलोचक, संपादक। 'क्या तो समय, कोई जगह तो हो' कविता संग्रह प्रकाशित। कविता के लिए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित। हिन्दी की प्रसिद्ध ई-पत्रिका समालोचना का संपादन।

अपने करियर की शुरुआत बीआई टीवी से करने वाले संजीव पालीवाल एक प्रख्यात पत्रकार हैं व आप 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। आप डीडी न्यूज, आज तक एवं नेटवर्क 18 में भी काम कर चुके हैं।

निलय उपाध्याय का जन्म 28 जनवरी 1963 को गांव दुल्लहपुर, बक्सर, जनपद भोजपुर, बिहार में हुआ। वे हिन्दी के चर्चित युवा कवि एवं समीक्षक हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं- दो कविता संग्रह 'अकेला घर हुसैन का' और 'कटौती'। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित कविताएं व लेख-समीक्षाएं प्रकाशित व प्रशंसित। उन्हें अनेक मानद सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

वाणी प्रकाशन 55 वर्षों से 32 विधाओं से भी अधिक में बेहतरीन हिन्दी साहित्य का प्रकाशन कर रहा है। इसने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो प्रारूप में 6,000 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। वाणी प्रकाशन ने देश के 3,00,000 से भी अधिक गांवों, 2,800 कस्बों, 54 मुख्य नगरों और 12 मुख्य ऑनलाइन बुक स्टोरों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। वाणी प्रकाशन भारत की प्रमुख पुस्तकालय प्रणालियों, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, ब्रिटेन और मध्य-पूर्व से भी जुड़ा हुआ है।

वाणी प्रकाशन की सूची में साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत 32 पुस्तकें और लेखक, हिन्दी में अनूदित 9 नोबेल पुरस्कार विजेता और 24 अन्य प्रमुख पुरस्कृत लेखक और पुस्तकें शामिल हैं। संस्था को क्रमानुसार नेशनल लाइब्रेरी, स्वीडन, इंडोनेशियन लिटरेरी क्लब और रशियन सेंटर ऑफ आर्ट कल्चर तथा पोलिश सरकार द्वारा इंडो-स्वीडिश, रशियन और पोलिश लिटरेरी सांस्कृतिक विनिमय विकसित करने का गौरव प्राप्त है।

वाणी प्रकाशन ने 2008 में भारतीय प्रकाशकों के संघ द्वारा प्रतिष्ठित 'गण्यमान्य प्रकाशक पुरस्कार' भी प्राप्त किया है। लंदन में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा 25 मार्च 2017 को वातायन सम्मान तथा 28 मार्च 2017 को वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक व वाणी फाउंडेशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी को ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में एक्सीलेंस अवॉर्ड से नवाजा गया।

प्रकाशन की दुनिया में पहली बार हिन्दी प्रकाशन को इन 2 पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। हिन्दी प्रकाशन के इतिहास में यह अपूर्व घटना मानी जा रही है। 3 मई 2017 को नई दिल्ली के 'विज्ञान भवन' में 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कर-कमलों द्वारा 'स्वर्ण-कमल- 2016' पुरस्कार 'लता : सुर-गाथा' पुस्तक बतौर प्रकाशक वाणी प्रकाशन को प्रदान किया गया।

भारतीय परिदृश्य में प्रकाशन जगत की बदलती हुई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वाणी प्रकाशन ने राजधानी के श्रेष्ठ पुस्तक केंद्र ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम-श्रृंखला की शुरुआत की है जिनमें 'हिन्दी महोत्सव' उल्लेखनीय है।

उम्मीद है कि विश्व पुस्तक मेला 2018 में 'कविता कुंभ' पर होने वाले इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक पाठक और बुद्धिजीवी हिस्सा लेंगे तथा पूरे आयोजन को सफल और यादगार बनाएंगे।

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