राहुल हवाई जहाज में, इसलिए मैं पैदल-विश्वास

-अमेठी से दीपक असीम

भाषा|
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'राहुल गांधी जब नामांकन भरने आए तो तीन हवाई जहाज आए थे। वो पैसा मेरे टैक्स का था। एक में वे थे, एक में उनकी अम्मा थीं और एक में उनकी बहना। मैं आम आदमी हूं इसलिए अमेठी मुख्यालय से गौरीगंज तक 15 किलोमीटर पैदल चलकर जाऊंगा।' यह कहना है आम आदमी पार्टी से अमेठी लोकसभा उम्मीदवार का। उनके चुनाव दफ्तर पर उनसे चलते-फिरते कुछ चर्चा हुई।

किन मुद्‌दों पर चुनाव लड़ रहे हैं?
कुछ मुद्दे तो वही हैं सडक, बिजली, पानी, स्वास्थ्य शिक्षा...। मगर मूल मुद्‌दा है जनप्रतिनिधि का जनता के लिए यहां मौजूद रहना। मेरा मुख्य मुद्‌दा यही है कि मैं यहां हमेशा रहूंगा। अमेठी के लोगों के लिए काम करूंगा।

मकान खरीद लिया?
बिलकुल खरीद लिया है। आवास विहार कॉलोनी, गम्मौर रोड पर। मैं राहुल गांधी की तरह नहीं हूं। जब राहुल से सरकारी अधिकारी ने पूछा कि आपका पता क्या है, तो कहने लगे कमरा नंबर एक, मुंशीगंज गेस्ट हाउस। सरकारी अधिकारी ने उन्हें यहां का निवासी मानने से इनकार कर दिया था।
आपके कार्यकर्ता तो सब बाहरी लोग...?
बाहर से तो लोग आज आए हैं। यहां पर मैंने 25 हजार कार्यकर्ता बनाए हैं। 16 हजार तो बूथ कार्यकर्ता ही हैं। 'एक बूथ दस यूथ' का नारा दिया गया है। पिछले साढ़े तीन महीनों में मैंने ग्यारह सौ पचास गांवों की धूल छानी है। चालीस रातें गांवों में गुजारी हैं। इतने दिन तो आज तक सब मिलाकर भी राहुल अमेठी के गेस्ट हाउस में नहीं रुके।
चुनाव हार जाएंगे तब भी यहीं रहेंगे?
चाहे कुछ हो जाए यहीं रहूंगा। वैसे मैं चुनाव जीत रहा हूं।

वाकई 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे?
हां, बिल्कुल...मुझे आदत हो गई है। मेरा वजन 10 किलो घट गया है। हालांकि पहले भी ज्यादा नहीं था। पैदल जाने की वजह यह है कि मैं आम आदमी हूं। गांव वालों की तरह मैं भी बहुत पैदल चल सकता हूं। राहुल गांधी जब नामांकन भरने आए थे तो तीन हवाई जहाज आए थे। एक में वे खुद थे। एक में अम्मा और एक में बहना। तीनों विमान सरकारी थे। यानी मेरे टैक्स के पैसों से वे हवाई जहाजों में घूम रहे हैं। रामायण की एक चौपाई है- रावण रथी, विरथ रघुवीरा, देख विभीषण भयउ अधीरा...। यानी रावण रथ पर थे और राम बगैर रथ के...। मैं आम आदमी हूं, बिना विमान, बिना गाड़ी के।

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