हिन्दी कविता : बाल-कांड


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 शशांक तिवारी
                                       
 कौसल्या ने पुत्र जना, रामचन्द्र ही आज
अस्पताल बारात हुई, शुरू हो गया नाच
 
 भरत शत्रुघ्न लक्ष्मण, पुत्र तीन थे और 
पूरी अयोध्या नाच उठी, खुशियों का था दौर  
 
जनकपुरी के एम्स में, सीता का हुआ जन्म
विद थ्री सिस्टर देख के, खुशी से आंख > पुत्र सभी बड़े हुए, पहुंचे अब स्कूल > इंटर तक रखा गया, मोबाइल से दूर
 
ग्रेजुएशन में बनाई, फेसबुक पर आईडी
सीता मईया ऐड हुई, हो गई अच्छी दोस्ती
रचा स्वयंवर जनक ने, अच्छे वर को सोच
 देख अकेला गार्डन में, प्रभु ने किया प्रपोज  

चारिहुं भाई का, निपट गया विवाह 
लेते सेल्फी वे सभी, थी बीवि‍यों की इच्छा

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