बचपन के वो दिन ..

की यादें ताजा करतीं ये पंक्तियां, जिनसे हमारे चेहरे पर छा जाती थी मुस्कान .. 
जिन्हें हम दिल से गाते गुनगुनाते थे, और खेल खेलते थे, तो आइए यादें ताज़ा कर लीजिये ... 
 
मछली 
मछली जल की रानी है,जीवन उसका पानी है।
हाथ लगाओ डर जायेगी, बाहर निकालो मर जायेगी।
 
 
पोशम्पा भाई पोशम्पा
चाय की पत्ती पोशम्, सौ रुपये की घड़ी चुराई।
अब तो जेल मे जाना पड़ेगा,जेल की रोटी खानी पड़ेगी,
जेल का पानी पीना पड़ेगा, थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश।
 
अगले पेज पर आलू-कचालू .. 

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