वन्य प्राणियों को जंगल सफारी से निहारेंगे पर्यटक

वन्यजीवों को देखने का लुत्फ उठाएंगे पर्यटक

भाषा|
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छत्तीसगढ़ की राजधानी से हट कर नए रायपुर में बनने वाले मानव निर्मित जंगल सफारी में पर्यटक बंद गाड़‍ियों में वन्यजीवों के स्वतंत्र रूप से विचरण करने का लुत्फ उठा सकेंगे। करीब 203 हेक्टैयर क्षेत्र में बनने वाले इस मानव निर्मित जंगल के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ के ने भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इस जंगल सफारी के निर्माण में लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने 19 अक्टूबर को नया रायपुर क्षेत्र में बनने वाले एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित जंगल सफारी का भूमिपूजन और शिलान्यास किया और कहा कि हरियाली, पर्यावरण, जैव-विविधता और वन्य प्राणियों के प्रति आम जनता में और विशेष रूप से नई पीढ़ी में आकर्षण और जागरूकता बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके निर्माण में लगभग दो सौ से ढाई सौ करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के लिए एक मूल्यवान और ऐतिहासिक धरोहर होगा।
सिंह ने कहा कि इस जंगल सफारी में वन्य प्राणी स्वतंत्र विचरण करेंगे और सैलानी बंद गाड़ियों में बैठकर उन्हें देखेंगे और आनंद ले सकेंगे। इस परियोजना को आकार देने के लिए राज्य के वन मंत्री सहित वन विभाग के अधिकारियों ने देश के कई जंगल सफारियों में जाकर उनका अध्ययन किया तथा दक्षिण अफ्रीका भी गए।

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अधिकारियों ने बताया कि नया रायपुर के दक्षिणी छोर पर खण्डवा गांव के नजदीक लगभग 203 हेक्टैयर के विशाल क्षेत्रफल में बनने वाला यह एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा मानव निर्मित जंगल सफारी होगा, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्राकृतिक मनोरंजन के साथ-साथ राज्य में वन्य प्राणी अनुसंधान केन्द्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। जंगल सफारी के कुल रकबे में लगभग 52.52 हेक्टैयर का जल क्षेत्र भी शामिल रहेगा।
इस जंगल सफारी में प्रतिदिन लगभग 10 हजार सैलानी आकर विश्वस्तरीय प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन कर सकेंगे। राज्य सरकार के वन विभाग द्वारा इस जंगली सफारी का निर्माण और विकास कैम्पा निधि से तथा केन्द्रीय चिड़िया घर प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। नया रायपुर शहर के सम्पूर्ण परिदृश्य को हितैषी बनाए रखने के लिए जंगल सफारी की पूरी बाहरी सुरक्षा दीवार को हरित अहाता (ग्रीन बाउंड्रीवाल) के रूप में बनाया जाएगा। इसकी सतह हरित दीवार की तरह नजर आएगी, जबकि आंतरिक सतह केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के मापदण्डों के अनुसार सुरक्षित होगी।
इस हरित बाउंड्रीवाल की कुल लंबाई सात किलोमीटर होगी। इसमें से 4.85 किलोमीटर का हिस्सा भूमि पर बनेगा, जबकि पानी से होकर गुजरने वाली दीवार की लंबाई 2.15 किलोमीटर होगा।

जंगल सफारी में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की विश्व प्रसिद्ध कुटुम्बसर प्राकृतिक गुफाओं के अनुरूप 294 मीटर की लंबी गुफा भी बनाई जाएगी। इस गुफा में पैदल चलकर लोग नया रायपुर के पर्यावरण हितैषी (इको फ्रेंडली) बस पार्किंग स्थल तक पहुंच सकेंगे। वहां से जंगल सफारी भ्रमण के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई इको फ्रेंडली बस की सुविधा मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया कि नया रायपुर के जंगल सफारी को मुख्य रूप से आठ भागों में विकसित किया जाएगा। इनमें स्मारक क्षेत्र, वाहन पार्किंग क्षेत्र, प्रशासनिक क्षेत्र, प्रतीक्षा क्षेत्र, चिड़ियाघर क्षेत्र, सफारी क्षेत्र, प्रबंधन क्षेत्र और जल क्षेत्र शामिल रहेंगे। जंगल सफारी का चिडि़याघर क्षेत्र लगभग 97 हजार वर्गमीटर में विकसित किया जाएगा। इसमें से 13 हजार पांच सौ वर्गमीटर में तेन्दुआ, 2600 वर्गमीटर में सियार, 2400 वर्गमीटर में भेड़िया, 2200 वर्गमीटर में लकड़बग्घा और 2100 वर्गमीटर में जंगली सुअर का प्रदर्शन क्षेत्र होगा।
इसके अलावा मगरमच्छ के लिए 2200 वर्गमीटर तथा घड़ियाल के लिए 2700 वर्गमीटर का क्षेत्र निर्धारित रहेगा। चिड़ियाघर क्षेत्र में 3400 वर्गमीटर में सर्प उद्यान (स्नेक पार्क), 2100 वर्गमीटर में रात्रिचर प्राणी स्थल और 1500 वर्गमीटर में पक्षियों के लिए प्रदर्शन केन्द्र बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जंगल सफारी का कुल क्षेत्रफल 11 लाख वर्गमीटर के आस-पास होगा। सम्पूर्ण सफारी क्षेत्र को वन्य प्राणियों की जीवन शैली के हिसाब से चार भागों में विकसित किया जाएगा, जिसमें तीन लाख आठ हजार नौ सौ वर्गमीटर में शाकाहारी सफारी, लगभग दो लाख वर्गमीटर में लॉयन सफारी, दो लाख तीन सौ वर्गमीटर में भालुओं के लिए बीयर सफारी और दो लाख छह हजार वर्ग मीटर में टाइगर सफारी का निर्माण किया जाएगा।
प्रबंधन क्षेत्र में शाकाहारी और मांसाहारी वन्य प्राणियों की भोजन व्यवस्था के लिए स्टोर और किचन भी अलग-अलग बनाने की व्यवस्था है। सफारी के जल क्षेत्र में पांच लाख 25 हजार दो सौ वर्गमीटर का जल क्षेत्र होगा। इसकी गहराई बढ़ाने के साथ-साथ किनारों का संधारण भी किया जाएगा। वहां पहले से उपलब्ध एक लाख 32 हजार वर्गमीटर के जल क्षेत्र में जलीय पक्षियों का इलाका विकसित किया जाएगा। सफारी के प्रतीक्षा क्षेत्र में आईमेक्स थिएटर, ओपन थिएटर, संग्रहालय, सूर्य घड़ी, भूल-भुलैय्या सहित मनोरंजन की सुविधाएं रहेंगी।
इसके अलावा वहां पर आवश्यक वस्तुओं की दुकानों के साथ सैलानियों के लिए तीन कैन्टीन और प्राथमिक चिकित्सा के लिए औषधालय आदि का निर्माण किया जाएगा। (भाषा)

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