परंपराओं से स्थापित प्रकृत‍ि व पर्यावरण का परस्पर संबंध


बरगद, वट, बनयान, फाइकस बेन्गालेनसिस - 
 
1 हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।  
2 हिन्दी में बरगद, संस्कृत में वटवृक्ष, मराठी में वट, अंग्रेजी में बनयान व वनस्पतिशास्त्र में इसे फाइकस बेन्गालेनसिस कहा जाता है।>  
3 कलकत्ता में इसका 250 वर्ष पुराना सबसे बड़ा है। इसलिए इस प्रजाति का नाम फाइकस बेन्गालेनसिस पड़ा।
4 इसका पुराना तना सड़ने के बाद भी यह अपनी वायवीय जड़ों के कारण हरा भरा रहता है। इसलिए यह दीर्घजीवी व अमरता का प्रतीक है। >  
5 प्राचीन समय में भारतीय व्यापारी (बनिया) अपना व्यापार इसी की घनी छाया में करते थे इसलिए इसका नाम बनयान पड़ा।  
6 इसकी जड़े स्तंभ (तने) से निकल धरती की ओर विकसित होती हैं व पुनः बाहर निकलती हैं।
 
7 यह वृक्ष अधिक तापमान व अधिक उमस वाले क्षेत्रों में पनपता है।

8 इसके बीजों को 12 घंटे गरम पानी में भिगोकर रखने के बाद बोने से ही अंकुरण से नया पौधा तैयार होता है।
 
9 इसमें 2 प्रकार की जड़ें पाई जाती हैं -
1. सामान्य जड़ें - धरती के अंदर नीचे की ओर विकसित होती है।
2. अस्थानिक जड़ें - पेड़ की वायवीय शाखाओं से निकल भूमि में प्रवेश कर स्तंभ (खंबे) की तरह पेड़ को आधार देती हैं और स्तंभ मूल कहलाती है।

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