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ना भाषण, ना नारे, इन रचनात्मक सुझावों से पर्यावरण सुधारें

- डॉ. किसलय पंचोली
 
धरती पर निवास करने वाली विभिन्न प्रजातियों में मनुष्य के पास सर्वाधिक विकसित दिमाग है। हम में से हर कोई अपने दिमाग से कोई न कोई उपाय सोच कर धरती के क्षति ग्रस्त पर्यावरण को दुरुस्त करने में सहभागी बन पुण्य कमा सकता है। इसके लिए हम निम्न उपाय अपना सकते हैं.:-
* बचे हुए प्राकृतिक जंगलों को , उनकी सरहदों पर कंटीले तारों की बागड़ से घेरा जा सकता है। पेड़ों के छोटे से छोटे झुरमुट को भी इसी तरह बचाया जा सकता है। क्योंकि प्राकृतिक जंगलों का कोई विकल्प नहीं होता। 
 
* वृक्ष गणना अभियान चलाया जा सकता है। वृक्षों के तनों पर फ्लोरसेंट रंगों में अंकों की पट्टियां लगाई जा सकती हैं ताकि पता चल सके कि कहां कितने और किस प्रजाति के वृक्ष मौजूद हैं। 
 
* इस गणना कार्य हेतु रिमोट सेंसिंग की अत्याधुनिक तकनीक से धरती के चप्पे-चप्पे का "हरित मेप" बनाया जा सकता है। 
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