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लापतागंज के कलाकार
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टेलीविजन पर एक बार फिर साहित्य को स्थान मिलने की परंपरा शुरू हो रही है। दूरदर्शन पर आपने कई साहित्यकारों की कहानियों, उपन्यासों का नाट्य रूपांतर देखा होगा। इसी तरह की पहल अब सब टीवी ने की है। हिंदी के मशहूर व्यंग्यकार शरद जोशी की रचनाओं को अब 26 अक्टूबर से सोमवार से गुरुवार रात 10 बजे दर्शक 'लापतागंज' के रूप में देख सकेंगे।

सब टीवी के बिजनेस प्रमुख अनुज कपूर ने बताया कि यह ऐसा शो है जिससे सभी भारतीय अपने आपको जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। यह शरद जोशी की व्यंग्य रचनाओं पर आधारित है। हमें विश्वास है कि यह शो उसी तरह से आम आदमी के बीच लोकप्रिय होगा, जिस तरह उनकी रचनाओं को लोगों की प्रशंसा मिली थी। सही मायनों में उनके बेहतरीन कार्यों के प्रति श्रद्धांजलि है।

लापतागंज भारत के एक ऐसे गाँव की कहानी है जिसे सरकार और प्रशासन ने लंबे समय से भुला दिया है। गाँव में मुख्य किरदार मुकंदीलाल गुप्ता अपनी पत्नी इंदुमती और बेटे चुकंडी के साथ रहते हैं। हर समय मुस्कराते रहना उनकी आदत है। मिशरी बुआ लापतागंज की व्यथा की प्रतीक हैं जो अपनी गूंगी बेटी सुरीली के साथ रहती हैं। बिजी पांडेय जो हर समय व्यस्त रहते हैं इनका असली नाम पप्पू पांडेय है।

कहानी में कछुआ चाचा भी हैं। उन्हें किसी बात से कोई असर नहीं होता इसलिए इनका नाम गाँव वालों ने कछुआ चाचा रख दिया है। लापतागंज एक छोटा सा काल्पनिक शहर है जो शरद जोशी की रचनाओं से प्रेरित है। उन्होंने हास्य-व्यंग्य के द्वारा समाज की सच्चाइयों को उजागर किया है ।

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कलाकारों का परिचय :
मिशरी बुआ (शुभांगी गोखले): लापता गंज की व्यथा का प्रतीक हैं। भावुक और दयालु स्वभाव वाली मिशरी बुआ छोटी-छोटी बातों पर रो पड़ती हैं। उनके पास हर किसी के लिए सलाह है।

सुरीली (प्रीति अमीन) : मिशरी बुआ की सुंदर सी बेटी है। वह 'खाओ, जाओ, लाओ और आओ' के अलावा कुछ नहीं बोल पाती।

बिजी पांडेय (अब्बास) : बिजी पांडेय का असली नाम पप्पू पांडेय है। उनके रंग-बिरंगे कपड़े पांडेय के रंगीले व्यक्तित्व से मेल खाते हैं। उम्र 30 साल, शौक कानून की पढ़ाई। यह मानते हैं कि हर आदमी की जिंदगी में कहीं न कहीं लॉ है। जैसे ब्रदर इन-लॉ, फादर इन-लॉ, सिस्टर इन-लॉ आदि। यह महोदय अपनी बाइक पर केवल गलियों का चक्कर लगाने में बिजी यानी व्यस्त रहते हैं।

मुकंदी लाल गुप्ता (रोहिताश गौर) : चेहरे पर हमेशा मुस्कान तैरती है। उम्र लगभग 35 साल। जब खुश होते हैं तब भी और जब खुश नहीं होते तब भी मुस्कराते रहते हैं। यह सरकारी क्लर्क हैं पर आश्चर्य की बात है कि रिश्वत नहीं लेते।
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