मुख्य पृष्ठ > मनोरंजन > टीवी > आलेख
सुझाव/प्रतिक्रिया मित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
करियर से संतुष्ट रक्षंदा खान
Rakshanda
PR
बहुचर्चित धारावाहिक ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ को आज भी याद किया जाता है। इस धारावाहिक से जहाँ मोना सिंह को जस्सी के रूप लोकप्रियता मिली, वहीं इस धारावाहिक की वैंप रक्षंदा खान को भी मल्लिका के रूप में ख्याति मिली। अपने तीखे तेवरों के जरिए रक्षंदा ने इस भूमिका में अपनी अभिनय क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

रक्षंदा का मानना है कि वैम्प के रूप में एक कलाकार को अपनी अभिनय क्षमता दिखाने के ज्यादा अवसर मिलते हैं। इसीलिए वह उन भूमिकाओं को करने के लिए ज्यादा उत्सुक रहती है जिसमें ग्रे-शेड हो। ‘काजल’ धारावाहिक में कामायनी की भूमिका भी रक्षंदा को बेहद रास आ रही है।

रक्षंदा बेहद सुन्दर है। उसका गोरा रंग, नीली आँखे और शानदार शख्सियत उसे विदेशी लुक देता है। अभिनय के समय वह अपने चेहरे के जरिए तेज-तर्रार भाव प्रदर्शित करती है, शायद इसीलिए निर्देशक उसे नकारात्मक भूमिकाओं में लेना ज्यादा पसंद करते हैं।

रक्षंदा को निगेटिव किरदार को पर्दे पर साकार करना पसंद है, लेकिन वह टाइप्ड होने से भी बचना चाहती है। इसीलिए ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में वह तान्या के रूप में पॉजिटिव भूमिका निभा रही है।

रक्षंदा को एंकरिंग करना भी बेहद पसंद है। आए दिन वह विभिन्न चैनलों पर कई कार्यक्रमों की एंकरिंग करती हुई नजर आती है। अभिनय के मुकाबले में एंकरिंग करना कठिन है क्योंकि इसके जरिए दर्शकों को आपके विचार सुनने को मिलते हैं।

हाजिर-जवाब, कई विषयों का ज्ञान और भाषा का ज्ञान होना बहुत जरूरी होता है। वहाँ कुछ ऐसे संवाद आपको बोलना पढ़ते हैं जो खुद आपके हो। रक्षंदा की एंकरिंग में ये सारी बातें नजर आती हैं।

अपने टीवी करियर से रक्षंदा बेहद खुश है। उसका मानना है कि उसे बेहतरीन भूमिकाएँ निभाने को मिल रही है और फिल्मों के लिए उसके पास समय नहीं है। मनुष्य अगर संतुष्ट हो तो उससे सुखी और कोई नहीं होता, शायद रक्षंदा का जीवन जीने का फंडा भी यहीं है।
और भी
नच बलिए : पूजा का बुरा अनुभव
युवा रूप में पृथ्वीराज चौहान
अमर का दूसरा प्रयास
लता के सामने गाने का अवसर
गोल्ड अवार्ड की यादगार शाम
मोना को सवार हुआ नायिका बनने का भूत