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कम दिनों में 'दिल' की सैर
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खजुराहो
मंदिरों की खूबसूरत स्थापत्य कला का एक नमूना खजुराहो के मंदिरों में देखा जा सकता है। यहाँ चंदेला राजपूतों के साम्राज्य में एक हजार वर्ष पूर्व 85 मंदिर बनाए गए थे। इनमें से वर्तमान में 22 मंदिर ही अच्छी स्थिति में हैं। हवाई मार्ग से खजुराहो दिल्ली और आगरा से जुड़ा है। रेल और सड़क मार्ग से यह महोबा, हरबालपुर, सतना और भोपाल से जुड़ा है।
देखने के लिए खा
चौंसठ योगिनी, देवी जगदंबे, चित्रगुप्त, विश्वनाथ, नंदी, लक्ष्मण, वराह, मतंगेश्वर, पार्श्वनाथ, आदिनाथ, ब्रह्म, चतुर्भुज आदि मंदिर खजुराहो के आसपास स्थित हैं। सभी मंदिर शताब्दियों पुराने हैं।

कान्हा किसली
कान्हा टाइगर रिजर्व 940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला राष्ट्रीय उद्यान है। इसे देखने के लिए पर्यटक जीप किराए पर ले सकते हैं। टाइगर ट्रेकिंग के लिए हाथी पर सवार होकर भी उद्यान की सैर की जा सकती है। राष्ट्रीय उद्यान के भीतर दो स्थानों खतिया और मुक्की से जाया जा सकता है। कान्हा जबलपुर, बिलासपुर और बालाघाट से सड़क मार्ग के जरिए जुड़ा है। नजदीकी विमानतल और रेलवे स्टेशन जबलपुर है।
देखने के लिए खा
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में वन्यप्राणियों की 22 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। पक्षियों की यहाँ 200 प्रजातियाँ हैं।
बामनी दादर - यह एक सनसेट प्वाइंट है। यहाँ से सांभर और हिरण जैसे वन्यप्राणियों को भी देखा जा सकता है। यहाँ लोमड़ी और चिंकारा जैसे वन्यप्राणी काफी कम देखे जाते हैं।

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महेश्व
नगर महिष्मती के रूप में महेश्वर का रामायण और महाभारत में भी उल्लेख है। देवी अहिल्याबाई होलकर के कालखंड में बनाए गए यहाँ के घाट सुंदर हैं और इनका प्रतिबिंब नदी में और खूबसूरत दिखाई देता है। महेश्वर इंदौर से ही सबसे नजदीक है। इंदौर विमानतल महेश्वर से 91 किलोमीटर की दूरी पर है।
देखने के लिए खास
राजगद्दी और रजवाड़ा - महेश्वर किले के अंदर रानी अहिल्याबाई की राजगद्दी पर बैठी पर एक प्रतिमा रखी गई है।
मंदिर - महेश्वर में घाट के आसपास कालेश्वर, राजराजेश्वर, विठ्ठलेश्वर और अहिलेश्वर मंदिर हैं।

ओंकारेश्व
ओंकारेश्वर भी नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक कस्बा है। ज्योतिर्लिंग होने के कारण इस स्थल का धार्मिक महत्व है। इंदौर या महेश्वर से ओंकारेश्वर सड़क मार्ग से जुड़ा है। इंदौर से ओंकारेश्वर के बीच की दूरी 77 किलोमीटर है।
देखने के लिए खास
ओंकारेश्वर के ज्योतिर्लिंग मंदिर के अलावा सिद्धनाथ मंदिर और 24 अवतार मंदिर भी देखने लायक हैं।

पचमढ़ी-
प्राकृतिक सुंदरता के कारण हिलस्टेशन पचम़ढ़ी एक मशहूर पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। पचमड़ी भोपाल और पिपरिया से सड़क मार्ग से जुड़ा है। नजदीकी रेलवे स्टेशन पिपरिया है।
देखने के लिए खास
प्रियदर्शिनी - यह वह स्थल है जहाँ से वर्ष 1857 में पचमढ़ी की खोज की गई थी।
जमुना प्रपात - यह वह वॉटर फॉल जो पचमड़ी की जलापूर्ति करता है।
अप्सरा विहार - यह एक सुरक्षित पिकनिक स्पॉट है जहाँ जलप्रपात भी है।
रजत प्रपात, आयरेन पूल, जलावतरण, सुंदर कुंड, जटाशंकर मंदिर, धूपगढ़, पांडव गुफाएँ भी पर्यटन स्थल हैं।

पें
टाइगर रिजर्व और मोगली सेंचुरी के कारण पेंच राष्ट्रीय उद्यान जाना जाता है। यह 757 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यहाँ 1200 तरह के पेड़-पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 285 किस्म के पक्षी यहाँ चहचहाते हैं, इसलिए यह उद्यान बर्ड वॉचिंग के लिए एक उपयुक्त स्थान है। पेंच जबलपुर से सड़क मार्ग के जरिए जुड़ा है।


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मांडू
परमार शासकों द्वारा बनाए गए इस नगर में जहाज और हिंडोला महल खास हैं। यहाँ के महलों की स्थापत्य कला देखने लायक है। मांडू इंदौर से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सड़क मार्ग से यह धार से भी जुड़ा हुआ है।
देखने के लिए खास
दरवाजे - मांडू में दाखिल होने के लिए 12 दरवाजे हैं। मुख्य रास्ता दिल्ली दरवाजा कहलाता है। दूसरे दरवाजे रामगोपाल दरवाजा, जहांगीर दरवाजा और तारापुर दरवाजा कहलाते हैं।
जहाज महल - जहाजनुमा आकार में इस महल को दो मानवनिर्मित तालाबों के बीच बनाया गया था।
हिंडोला महल - टेड़ी दीवारों के कारण इस महल को हिंडोला महल कहा जाता है।
होशंग शाह की मस्जिद, जामी मस्जिद, नहर झरोखा, बाज बहादुर महल, रानी रूपमति महल और नीलकंठ महल भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
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