मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्राकृतिक खूबसूरती भी है और समृद्ध अतीत भी। यह शहर प्राचीनता और नवीनता का अद्भुत संगम है। ग्यारहवीं सदी के भोजपाल तथा तत्पश्चात भूपाल नामक इस नगर को परमारवंशी राजा भोज ने बसाया था। एक बहुरंगी तस्वीर पेश करता है। एक ओर पुराना शहर है जहाँ लोगों की चहल-पहल के बीच बाजार है, पुरानी सुंदर मस्जिदें तथा महल हैं। दूसरी तरफ नया शहर बसा हुआ है। जिसके सुंदर पार्क और हरे-भरे वृक्ष गहरी राहत देते हैं। भोपाल पाँच पहाड़ियों पर बसा है तथा इसमें दो झीलें हैं। यहाँ की जलवायु सम है। कहा जाता है कि भोपाल को अफगान सैनिक दोस्त मोहम्मद ने बसाया था।
दर्शनीय स्थल : जामा मस्जिद इस खूबसूरत मस्जिद की विशेषता हैं सुनहरी मीनारें। इसे 1837 में कुदसिया बेगम ने बनवाया था।
मोती मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद के आधार पर बनी इस मस्जिद को कुदसिया बेगम की बेटी सिकंदर जेहन ने 1860 में बनवाया था।
शौकत महल और सदर मंजिल शौकत महल शहर के बीचोंबीच चौक क्षेत्र में स्थित है। यह भवन निर्माण कला का अनोखा नमूना है। आस-पास के इस्लामी भवनों से यह बिल्कुल अलहदा दिखाई देती है। कारण यह है कि इसे एक फ्रांसीसी द्वारा डिजाइन किया गया था। पुनर्जागरण काल की शैली के दर्शन इसमें सहज ही किए जा सकते हैं। इसी के पास है सदर मंजिल जो भोपाल के शासकों द्वारा बनवाया गया सार्वजनिक हॉल है।
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