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चित्रकूट
स्फटिक शिला
मंदाकिनी के किनारे पर जानकी कुंड के कुछ किलोमीटर पीछे यह घने वनों से आच्छादित क्षेत्र है। यहाँ पर भगवान राम के पैरों के निशान हैं और यहीं पर सीता माता को जयंत नामक कौवे ने चोंच मारी थी। यहाँ नदी के स्वच्छ पानी में मछलियाँ आसानी से देखी जा सकती हैं।

जानकी कुंड
रामघाट से ऊपर जाने पर मंदाकिनी का मनमोहक नजारा दिखाई देता है। नदी के नीले पानी और हरे-भरे पेड़ों से यह स्थान बहुत ही सुरम्य लगता है। जानकी कुंड तक जाने के दो रास्ते हैं एक तो आप यहाँ नाव के जरिए पहुँच सकते हैं और दूसरे आप हरियाली देखते हुए सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं।
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