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वन्य-जीवन का सही दर्पण – बाँधवगढ़
श्रुति अग्रवाल

इन छुट्टियों को यदि आप हरियाली की गोद और वन्य जीव-जन्तुओं के साथ बिताना चाहते हैं तो बाँधवगढ़ आपके लिए सही जगह है। चार सौ अड़तालिस स्क्वायर किलोमीटर में फैला बाँधवगढ़ भारत के नेशनल पार्क में से एक है। यह जगह हिंदुस्तान की चुनिंदा टाइगर प्लेस में से एक मानी जाती है। यहाँ तक की विश्व प्रसिद्ध सफेद शेरों की जन्मस्थली भी यही है।


बाँधवगढ़ का इतिहास काफी रोचक है। यह लंबे समय से राजशाहों की पसंदीदा शिकारगाह रहा है। यूँ तो 1947 में ही रीवाँ रियासत को भारत सरकार ने अपने में मिला लिया था, लेकिन 1968 तक रीवाँ महाराज बाँधवगढ़ का उपयोग अपनी पसंदीदा शिकारगाह के रूप में करते रहे। 1968 में बाँधवगढ़ को नेशनल पार्क घोषित किए जाने के बाद से यहाँ पर शिकार प्रतिबंधित है

प्रमुख आकर्षणः-


वाइल्ड लाइफः- बाँधवगढ़ का प्रमुख आकर्षण यहाँ का जंगली जीवन है। बाँधवगढ़ शेर से लेकर चीतल, नील गाय, चिंकारा, बारहसिंगा, भौंकने वाले हिरण, साँभर, जंगली बिल्ली, जंगली भैंसे से लेकर 22 प्रजातियों के स्तनपायी जीव और लगभग 250 प्रजातियों के पक्षियों का रैन बसेरा है। यदि आप सही मौसम में सही वक्त पर बाँधवगढ़ आएँ तो आप इनमें से अधिकांश को निहार सकते हैं


यहाँ के जंगली जीवन को निहारने के लिए जीप या हाथी ही बेहतर सवारी मानी जाती है। घूमने के लिए आप सुबह से ही जंगल में निकल जाएँ, लेकिन शाम चार बजे से लेकर गोधूली बेला तक के बीच आप अधिकांश जानवरों खासकर बाघ को निहार सकते हैं
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