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खूबसूरत महाबलेश्वर
वर्षाकाल में यहाँ का सौंदर्य और भी बढ़ जाता है। उन दिनों घने बादल पहाड़ियों को ढँक लेते हैं।

घूमते हुए ऐसा लगता है जैसे बादलों के बीच पहुँच गए हों। पहाड़ियाँ हरी-भरी हो जाती हैं। जगह-जगह झरने फूट पड़ते हैं। नैसर्गिक सुंदरता के साथ ही यहाँ समीप ही ऐतिहासिक और पुरातत्व महत्व की कारला, भाजा और बेड़सा गुफाएँ भी हैं।

लोनावाला और खंडाला में देखने योग्य एक से बढ़कर एक सौंदर्य स्थल हैं, जिन्हें देखकर ऐसा लगता है मानों प्राकृति ने अपनी हरी-भरी ओढ़नी सारे क्षेत्र में फैला दी है।

आकर्षक स्थल

लोनावाला झील : यह नगर से 15 कि.मी. दूर आकर्षक पिकनिक स्थल है। यहाँ झील चारों ओर से प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है। यह सैलानियों को बेहद आकर्षित करती है।

तुंगरली झील : यह नगर का जल का प्रमुख स्रोत है। रेलवे स्टेशन से तीन कि.मी. दूर स्थित इस झील के रमणीय दृश्य पर्यटकों को बरबस मोह लेते हैं। झील के पास ही योग प्रशिक्षण केंद्र है। एक अस्पताल भी है जिसमें रोगियों का इलाज योग के द्वारा किया जाता है।

राजमची किला : लोनावाला रेलवे स्टेशन से यह 7 कि.मी. दूर है। यहाँ छत्रपति शिवाजी द्वारा बनवाया गया एक विशालकाय दुर्ग है। लोग इसे शाही छत भी कहते हैं।

मुमुज चिड़ियाघर : यह राजमची से एक कि.मी. दूर है। इसमें अनेक प्रकार के पशु-पक्षी हैं। यह अपराह्न 4 से 6 बजे तक खुला रहता है।

बलवन बाँध : इस स्थान के समीप एक बेहद खूबसूरत उद्यान है। शाम के समय यहाँ सैर करने का अपना अलग ही आनंद है। यह लोनावाला से डेढ़ कि.मी. दूर है।

कारला गुफाएँ : ईसा पूर्व डेढ़ सौ वर्ष की इन गुफाओं से निर्मित भित्ति चित्र और मूर्तियाँ शिल्पकला के बेजोड़ नमूने हैं जो देखते बनते हैं। ये लोनावाला से लगभग 12 कि.मी. दूर तथा मुख्य सड़क से डेढ़ कि.मी. की दूरी पर स्थित हैं। ये गुफाएँ बाहरी व भीतरी दोनों ओर से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। गुफाओं के द्वार पर स्थित खंभों पर शेरों की आकृतियाँ खुदी हुई हैं। खंभों वाली चौखट पर उकेरी गई मिथुन जोड़ों की तस्वीरें भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

लोहागढ़ किला : यह किला एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। ऊपर से नीचे बसी बस्तियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है जो बड़ा लुभावना लगता है।

वेलिंगटन के ड्यूक की नाक : इस पहाड़ी के शिखर पर एक चट्टान नाक के आकार में उभरी हुई है, जो इंग्लैंड के राजकुमार की नाक से मेल खाती थी तभी से इस पहाड़ी का यह नाम मशहूर हो गया। यह खंडाला की सबसे प्रसिद्ध पहाड़ी है।

भाजा की गुफाएँ : मुख्य सड़क से 3 कि.मी. दूर भाजा की 18 गुफाएँ लगभग दो सौ ईसा पूर्व की हैं। इसके दक्षिण में 14 स्तूपों का एक अनोखा समूह है जिसमें 5 स्तूप अंदर की ओर तथा 9 बाहर की ओर हैं।

वेड्सा की गुफाएँ : ये कामशेत स्टेशन से 6 कि.मी. दक्षिण-पूर्व में हैं, जिन्हें देखा जा सकता है।

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