तिरूवल्लुवर की प्रतिमाः विवेकानंद स्मारक के करीब इस भव्य प्रतिमा को स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की तर्ज पर बनाया गया है। 133 फुट ऊंची इस प्रतिमा को लगभग पाँच हजार शिल्प कर्मियों ने बेहद मेहनत से बनवाया था।
यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण समुद्र का संगम है। यहाँ की रेत पर अपने साथी के हाथों में हाथ डालकर चलना बेहद रोमांटिक अनुभव होता है। इसके अलावा कन्याकुमारी में कुछ किलोमीटर उत्तर में नागरकोविल में वनविहार और पद्मनाभपुरम में एक पुराना किला है। कन्याकुमारी से 34 किलोमीटर दूर उदयगिरी का किला है जो 18 वीं शताब्दी में बनाया गया था, जिसका निर्माण राजा मार्तंडवर्मा करवाया था।
कन्याकुमारी से वापस अपने शहर लौटते हुए यदि आप कुछ निशानी ले जाना चाहें तो यहाँ के समुद्री जीवन से प्राप्त शंख, घोघें, मोती, शैवाल आदि से बने जेवर, शो पीस, साउथ सिल्क की साड़ियाँ और काजू आपके लिए बेहतरीन यादगार और उपहार साबित हो सकते हैं। इसलिए जब भी आपका मन करे सागर किनारे सैर का मजा लेने का तो चले आएँ कन्याकुमारी...यहाँ सबकुछ बेहद सुंदर है।
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