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यमनोत्री धाम
यमुना के उद्गम स्‍थल की यात्रा
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अन्‍य आकर्षण : यमुना नदी के मंदिर के अतिरिक्‍त यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है- सूर्यकुंड। यह गर्म पानी का कुंड है जिसका पानी 80 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु इस कुंड में आलू और चावल उबालकर उसका भोग यमुना देवी को लगाते हैं।

दिव्‍यशिला : सूर्यकुंड के समीप एक शिला है, जिसे दिव्यशिला या ज्‍योतिशिला भी कहा जाता है। श्रद्धालु यमुना मैया की पूजा करने से पहले इस शिला की पूजा करते हैं।

कब जाएँ : यमनोत्री के पट हर साल हिन्दू कैलेंडर के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन खोले जाते हैं। अक्षय तृतीया की तिथि प्रतिवर्ष अप्रैल या मई माह के दौरान आती है। यमनोत्री के पट नवंबर माह तक दर्शनों के लिए खुले रहते है। अप्रैल से सितंबर के मध्‍य यहाँ यात्रा करना मौसम और जलवायु की दृष्टि से सुविधाजनक होता है
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सितंबर के बाद यहाँ की जलवायु बहुत अधिक ठंडी हो जाती है। दिसंबर से मार्च तक यह पूरा मार्ग बर्फ से ढँक जाता है इसलिए दर्शनार्थियों को यहाँ जाने की अनुमति नहीं मिलती।

कैसे पहुँचें : ऋषिकेश से 220 किमी का सड़क मार्ग तय करने के बाद फूलचट्टी नामक स्‍थान से यमनोत्री की चढ़ाई प्रारंभ होती है। फूलचट्टी तक श्रद्धालु अपनी इच्‍छानुसार बस या निजी वाहन से पहुँच सकते हैं।

समीपस्‍थ हवाई अड्डा : देहरादून स्थित जौलीग्रांट सबसे समीप स्थित हवाई अड्डा है।

सड़क मार्ग : ऋषिकेश से यहाँ आने के लिए बस एवं जीप आदि वाहनों की सुविधा उपलब्‍ध होती है।

कहाँ ठहरें : यात्रियों के ठहरने के लिए यमनोत्री और इसके पूरे मार्ग पर यात्री विश्रामगृह, निजी विश्रामगृह और धर्मशालाएँ उपलब्‍ध हैं।

सावधानियाँ :
यमनोत्री की यात्रा पर जाने से पूर्व अपने साथ गर्म कपड़े अवश्‍य रखें।
पैरों में डिजाइनर चप्‍पलों या सैंडल की बजाए स्‍पोर्टस शू पहनें तो चढ़ाई करने में आसानी रहेगी।
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