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चलो बुलावा आया है.....
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कैसे जाएँ- माता वैष्णव देवी भवन की चढ़ाई कटरा से 12 किलोमीटर है। कटरा तक आप दिल्ली या देश के किसी अन्य शहर से रेल, बस या हवाई मार्ग से पहुँच सकते हैं। यूँ तो अधिकांश भक्त पैदल ही चढ़ाई करना पसंद करते हैं, लेकिन अशक्त लोगों के लिए डोली (पालकी) से लेकर हेलीकॉफ्टर तक की सुविधा उपलब्ध है।

कब जाएँ - हर साल भारतवर्ष एवं विश्व से लगभग 70 लाख श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। यहाँ पर माता के दर्शन के लिए 365 दिन, 24 घंटे कतार लगातार लगी रहती है। लेकिन यदि आप एकांत में दर्शन करना चाहें तो 20 जनवरी से लेकर फरवरी अंत तक यहाँ भीड़ नहीं रहती है। लेकिन ध्यान रखें, इस समय यहाँ का मौसम बेहद ठंडा होता है। वहीं दिसंबर से जनवरी और नवरात्र के दिनों में यहाँ पैर रखने की जगह भी नहीं मिलती। ठंड के मौसम में बर्फबारी ज्यादा होने के कारण कभी-कभी यहाँ का श्राइन बोर्ड एक-दो दिनों के लिए पट बंद कर देता है।

बजटः- माँ के दरवाजे पर गरीब-अमीर का कोई भेद नहीं है। बस यदि आप चढ़ाई में अक्षम हैं तो डोली या हेलीकॉफ्टर का खर्चा उठाना होगा। रही भोजन-कंबल की बात तो रास्ते में इतने भंडारे मिलेंगे कि आप खाते-खाते थक जाएँगे, लेकिन खिलाने वालों की कमी न होगी

टिप्स - वैष्णो देवी की चढ़ाई करते समय बुजुर्गों का खास ख्याल रखें। अपने साथ सारी जरूरी दवाइयाँ अवश्य रखें।

पालकी वालों से थोड़ा मोलभाव करना पड़ सकता है। साथ ही यदि कोई बीमार या अशक्त व्यक्ति आपके साथ है तो उन्हें धीरे चलने की हिदायत अवश्य दे दें।

लंबी चढ़ाई में होने वाली थकान से बचने के लिए माँ के दरबार में जाने से कुछ दिन पहले से ही पैदल चलना शुरू कर दें
बाकी माँ के नाम का जयकारा लगाइए। आपको कोई तकलीफ नहीं होगी।
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