राजधानी का रिज अब अवैध शिकारियों का अड्डा बन रहा है। मध्य रिज इलाके में राष्ट्रीय पक्षी मोर एवं तीतर का अवैध शिकार हो रहा है। दोनों ही वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित पक्षी हैं। दिल्ली के कंजरवेटर एवं चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डीएम शुक्ला ने भी माना कि रिज में अवैध शिकार हो रहा है। श्री शुक्ला के अनुसार इस शिकार को रोकने के लिए अपेक्षित सुरक्षा गार्डों एवं खुफिया सूचना तंत्र का अभाव है। एक परेशानी यह भी है दिल्ली में ऐसी प्रयोगशाला नहीं है जहां जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि यह संरक्षित वन्य पक्षियों का माँस है।अतिक्रमण की वजह से काफी खुले इलाकों वाले रिज क्षेत्र को अवैध शिकारियों ने अपना ठिकाना बना लिया है। सेंट्रल रिज तीन ओर से स़ड़क से घिरा होने के साथ ही सुनसान है। साथ ही यहाँ से होटल भी काफी नजदीक है। अब अवैध शिकारी पक्षियों को मारकर पारिस्थितिकीय तंत्र को नुकसान तो पहुँचाते ही हैं। उनके शिकार का तरीका भी रिज के पर्यावास को भारी नुकसान पहुँचा रहा है। वे पक्षियों के शिकार के लिए आग का प्रयोग कर रहे हैं। वे जंगल में आग लगाकर खुले इलाके में जाल बिछा देते हैं। जब पक्षी आग से बचने के लिए खुले इलाके में आते है तो शिकारियों द्वारा वहाँ पहले से बिछाए गए जाल में ये पक्षी फँस जाते हैं।रिज संरक्षण से जु़ड़े प्रो. सीआर बाबू के अनुसार अभी हाल ही में दिल्ली के वन विभाग ने शिकारियों के 20 जाल पक़ड़े थे। जाल का पता बाद में चलने के कारण शिकारी बहाना बनाकर भागने में सफल रहे। श्री शुक्ला के अनुसार रिज के चारों ओर बाउंड्री वाल नहीं होने के कारण उसका फायदा उठाते हैं। वहाँ आस पास से कई कच्चे रास्ते हैं जिसके जरिए लोग रिज के भीतर घुसकर लक़ड़ी तो़ड़ने से लेकर अवैध शिकार तक का काम करते हैं।राजधानी में तीतरों को संख्या पहले से ही काफी कम है। इधर संरक्षणवादियों के प्रयास के बाद इनकी संख्या में ब़ढ़ोतरी होने लगी थी। अवैध शिकारियों की वजह से इनके लुप्त होने का खतरा ब़ढ़ गया है। राजधानी के आस पास के हाइवे पर कई लाइन होटल गैर कानूनी रूप से पर्यटकों को मोटी कीमत लेकर तीतर का माँस परोसते हैं। |