भोपाल के वन विहार में शेरू नामक तेंदुए की गुरुवार को मौत हो गई। इस मौत के बाद वन विहार के अधिकारी भी सकते में हैं। बुधवार को ही यहाँ बाघिन ईरा ने दम तोड़ा है। उसकी मौत के 24 घंटे में ही शेरू की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह रही कि गुरुवार को सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वन विभाग की समीक्षा बैठक बुलाई थी। इसमें तमाम अधिकारी मौजूद थे। सभी को अंदेशा था कि बुधवार को मरी ईरा की मौत को लेकर सीएम के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। और ऐसा हुआ भी। हालांकि जब बैठक चल रही थी तभी वन विहार में एक तेंदुआ भी दम तो़ड़ रहा था। वन्य प्राणी हैं उम्रदराज : वन विहार में अभी तीन बाघ, आठ सिंह, पाँच तेंदुआ और एक भालू ऐसे हैं, जो अपनी औसत आयु पूरी हो चुकी है। इन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। | | कहा तो यहाँ तक जाता है कि मुर्गियों के डॉक्टर भी बाघों का इलाज कर रहे हैं। यह भी तथ्य है कि जो भी बाघ,सिंह आदि वन विहार में बीमार हुआ वह जीवित नहीं बचा। यानि पशु चिकित्सक इन बेजुबान जानवरों का दर्द समझने में लगातार नाकाम हो रहे हैं। |
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संसाधनों की माँग : वन विहार प्रबंधन ने वनमंत्री के समक्ष एक और चिकित्सक, कंपाउंडर और लैब-तक्नीशियन देने की माँग की है। इसके साथ ही अस्पताल में आधुनिक उपकरण और अन्य संसाधन मुहैया कराने को कहा है।चिकित्सा व्यवस्था भी कटघरे में : बीते कुछ सालों से वन विहार की चिकित्सा व्यवस्था भी सवालों और संदेह के घेरे में हैं। मुश्किल यह है कि वेटेनरी विभाग के जिन पशु चिकित्सकों से जानवरों का इलाज कराया जाता है, वे बाघों और ऐसे ही बडे जंगली जानवरों के इलाज में सिध्दहस्त नहीं हैं। कहा तो यहाँ तक जाता है कि मुर्गियों के डॉक्टर भी बाघों का इलाज कर रहे हैं। यह भी तथ्य है कि जो भी बाघ,सिंह आदि वन विहार में बीमार हुआ वह जीवित नहीं बचा। यानि पशु चिकित्सक इन बेजुबान जानवरों का दर्द समझने में लगातार नाकाम हो रहे हैं। एक तथ्य यह भी है कि भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान बरेली से वाइल्ड लाइफ हेल्थ केयर मेनेजमेंट का प्रशिक्षण ले चुके एक डॉक्टर को इसलिये वन विहार से हटा दिया गया था क्योंकि एक बाघ की मौत हो गई थी। जानकारी के मुताबिक वन विहार के कर्मचारियों ने गुरुवार सुबह शेरू को खाना दिया तो उसने नहीं खाया। तत्काल वरिष्ठ अधिकारी चिकित्सक अतुल गुप्ता के साथ बा़ड़े में पहुँचे। चिकित्सक ने तेंदुए का इलाज शुरू किया, लेकिन दोपहर बारह बजे उसकी मौत हो गई। बाद में डॉक्टरों के पैनल द्वारा पीएम के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पैनल में स्टेट वैटेनरी लैब की डॉक्टर सीमा भिंडवाले, डॉक्टर आनंद सिंह कुशवाहा, डॉक्टर काजल जादव और डॉक्टर अतुल गुप्ता शामिल थे। शेरू को दो साल पहले सिवनी के जंगल से घायल अवस्था में लाया गया था।वन विहार डायरेक्टर एसएस राजपूत का कहना है कि शेरू की उम्र 17 साल से अधिक थी इस कारण उसकी स्वाभाविक मौत हुई है। इसकी पुष्टि पीएम रिपोर्ट से भी हुई है। हालांकि शेरू से उम्र में बडे तेंदुए श्यामू और ट्रेगा वन विहार में हैं। पिछले पाँच वर्षों में यहाँ पाँच तेंदुए समेत 15 बाघों की मौत हो चुकी है। वनमंत्री ने कहा व्यवस्था में सुधार लाओ : वन विहार में 24 घंटे के अंदर तेंदुए की मौत की सूचना मिलते ही वनमंत्री राजेंद्र शुक्ल और प्रधान मुख्य वनसंरक्षक वन्यप्राणी डॉक्टर एचएस पाबला ने वन विहार का दौरा कर घटना की जानकारी ली। इस दौरान वन विहार की मौजूदा चिकित्सा व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर भी चर्चा की गई। इस मौके पर वनमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने वन विहार डायरेक्टर को मौजूदा व्यवस्था में सुधार लाने और अपनी क्षमता के मुताबिक वन विहार को सुरक्षित रखने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि वन्यप्राणियों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। |