मुख्य पृष्ठ > मनोरंजन > पर्यटन > ताज़ा खबर
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
पर्यावरण का दुश्मन नं. वन है सीसा  Search similar articles
वाशिंगटन। वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार लाखों पाउंड के सीसा रांगा का प्रयोग शिकार, मछली पकड़ना एवं बंदूकों की गोलियों में होता है। पर्यावरण में सीसा रांगा पदार्थ का इस्तेमाल अधिक मात्रा में किया जाता है। इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है एवं वन्यजीवों के लिए जानलेवा भी हो सकता है

सीसा एक ऐसा पदार्थ है जिसके प्रयोग से जैविक प्रणाली को कोई लाभ नहीं होता एवं इसका प्रयोग गैसोलीन, पेंट, पेस्टीसाइड, खाने के डिब्बों में करने पर रोक लगाई गई है।1991 में जल में रहने वाले पक्षियों के शिकार एवं निशानेबाजी के लिए इसका प्रयोग किया गया।

इसके बारे में अभी और भी जानकारी प्राप्त करना बाकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किस प्रकार से सीसा वन्यजीवों पर अपना प्रभाव डालेगा। लेखकों ने कहा है कि कई अनुसंधान प्रलेखित किए गए हैं कि किस प्रकार से सीसे का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है विशेषकर गिद्ध एवं चील पर। किए गए अनुसंधानों में दर्शाया गया है कि सीसे के प्रयोग से किस प्रकार वन्यजीवों को नुकसान पहुँचता है।

शिकार किए जाने वाली जगहों पर प्रति एकड़ में 4 लाख से अधिक चली हुई गोलियाँ मिली हैं। शूटिंग रेंज में प्रति वर्ष 1.5 से 23 टन तक चली हुई गोलियों का सीसा आदि बरामद होता है और आउटडोर शूटिंग रेंज में यह मात्रा बढ़कर 80 हजार टन होती है। सही तरीके से यह बताया नहीं गया है कि कितनी मात्रा में सीसे के प्रयोग को किस प्रकार से रोका जा रहा है। 4382 टन की सीसा फिशिंग डोरी हर साल अमेरिका में बेची जा रही है।

यूएसजीसी के अनुसार संदूषित विशेषज्ञों डॉ. बारनेट राट्टनर एवं क्रिस फ्रासन ने बताया कि इससे किस प्रकार वन्यजीवों को खतरा है। जब सीसे से बनी बंदूक की गोली से कोई जानवर मरता है और उसे अन्य जीव खाते हैं तब इसके विष के समान दुष्प्रभाव पड़ते हैं और उनकी भी मौत हो सकती है। सीसा से व्यावहारिक, मानसिक एवं जैविक प्रभाव होता है और कई प्रजातियों के वन्यजीवों की मृत्यु की आशंका बढ़ जाती है।

गोला-बारूद एवं मछली को पकड़ने के लिए फिशिंग जलाशय प्रणाली में सीसे का प्रयोग किया जाता है। कुछ पर्यावरण पारिस्थितिकी में यह पदार्थ पानी में घुल जाता है एवं भूस्थल के पानी में प्रवेश करता है। इसके बाद यह पेड़-पौधे, जीव तथा मनुष्य के भीतर प्रवेश करता है या पौधों की जड़ों में चला जाता है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि सीसे से रेंगने वाले जंतुओं और पक्षियों पर कितना बुरा प्रभाव होता है।
और भी
पाक ने सिख पर्यटकों के लिए दरवाजे खोले
पर्यटन स्थलों पर उमड़ने लगी भीड़
अरावली पर्वत की चट्टानों की आयु पर होगा शोध
हिमाचल प्रदेश स्वर्ग हैं पैराग्लाईड़िंग सैलानियों के लिए
पर्यटकों के लिए तैयार असम के पार्क
हैप्पी जर्नी का प्लान