शिवपुरी। जून से शुरू हुई अच्छी वर्षा के कारण तीन-चार साल के बाद शिवपुरी जिले के प्रसिद्ध एवं प्राचीन पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की भीड़ लगना शुरू हो गई है। अच्छी वर्षा के कारण इन पर्यटन स्थलों के झरने बहने शुरू हो गए और जंगल भी हरा-भरा हो गया जिससे ये सभी स्थल मनोरम लगने लगे हैं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने लगे हैं। शिवपुरी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों भदैया कुण्ड, भूरा खो, टुन्डाभरखा खो, सुल्तानगढ़ जलप्रपात, माधव राष्ट्रीय उद्यान एवं उद्यान की सख्या सागर झील, संगमरमर की सुन्दर कलात्मक छत्री के बीच बने जलाशय आदि स्थान वर्षा के पानी से भरने लगे हैं। बहने लगे झरने जलप्रपात एवं झरने बहने लगे हैं। ये सभी स्थल घने वृक्षों से घिरे हैं और जंगल में हैं। जंगल हरा होने से इनकी सुन्दरता और भी बढ़ गई है। मोटरबोट का लुत्फ माधव राष्ट्रीय उद्यान की सख्या सागर झील में भी पानी बढ़ने के कारण इसमें नौका एवं मोटरबोट में घूमने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। यहाँ के राष्ट्रीय उद्यान की यह विशेषता है कि यह वर्षा ऋतु में बंद नहीं होता। अन्य राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य वर्षाकाल में पर्यटकों के लिए बन्द कर दिए जाते हैं, क्योंकि उनके कच्चे रास्तों में पानी-कीचड़ हो जाता है जिससे उनमें वाहन नहीं चल पाते। यहाँ के माधव राष्ट्रीय उद्यान में गिट्टी-मुरम की सड़कों का जाल बिछा है इसलिए इनसे वाहन आसानी से निकल जाते हैं। पिछले तीन-चार वर्षों से यहाँ वर्षा नहीं होने के कारण पर्यटन स्थलों पर पानी कम रहता था या वे सूखे ही रह जाते थे। इसलिए पर्यटक यहाँ बहुत कम आते थे।
रिमझिम फुहारों का मनभावन मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे खुशनुमा माहौल में ऐसा कौन शख्स होगा जो अपने घर में कैद होकर बैठना चाहेगा। बारिश की झड़ी जहाँ हर व्यक्ति को पानी में भीगने का आनंद लेने के लिए उकसा रही है, वहीं मन-मयूर भी प्रकृति के निकट पहुँचकर उसकी सुंदर छटा में खो जाने को अधीर व लालायित है। भीगे मौसम में जब प्रकृति ने हरियाली की मोहक चूनर ओढ़ ली है तब आसपास के प्राकृतिक, धार्मिक और पुरा-महत्व के रमणीय स्थल आपको सैर-सपाटे की दावत देकर अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं। जरूरत है आप घर से निकलिए और कहीं दूर जाकर प्रकृति के रूप-लावण्य का भरपूर रसास्वादन कीजिए। 'नईदुनिया' अपने संवाददाताओं के जरिए उनके जिले के दर्शनीय स्थलों की जानकारी एकजाई रूप से यहाँ पेश कर रहा है।
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