बीकानेर। हिमालय से भी प्राचीन अरावली पर्वतमाला की चट्टानों की आयु गणना और उनके अंतर-संबंधों के बारे में केंद्र सरकार के वित्तीय सहयोग से अनुसंधान कार्य किया जाएगा।
यह जानकारी देते हुए श्री डूंगर कॉलेज बीकानेर के भू-विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सतीश कौशिक ने बताया कि केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसके लिए 57 लाख रुपए की राशि मंजूर की है। इस राशि से कई विशेष उपकरण भी खरीदे जाएँगे।
उन्होंने बताया कि अध्यापन और शोध कार्य के प्रोत्साहन के लिए प्राप्त अनुदान राशि से विशेष उपकरण भी खरीदे जाएँगे जिनकी मदद से महाविद्यालय में चल रहे अनुसंधान कार्य को बढ़ावा दिया जाएगा। डॉ. कौशिक के अनुसार अत्याधुनिक और स्वचालित थिन सेक्शन इकाई से चट्टानों की .03 मिमी मोटाई की स्लाइड बनाकर माइक्रोस्कोप से चट्टानों का गहन अध्ययन एवं शोध किया जाएगा।
इससे अरावली विंध्याचल पर्वत की विभिन्ना चट्टानों की काल गणना को लेकर शोधकर्ताओं में उत्पन्ना अंतरविरोध को सुलझाने में भी मदद मिलेगी। इसके साथ-साथ चट्टानों की मजबूती, गुणवत्ता और उनके विश्लेषण तथा खनिजों की पहचान एवं उनमें निहित तत्वों का पता लगाने संबंधी कार्य भी किए जा सकेंगे। पश्चिमी राजस्थान के मालानी क्षेत्र में उपलब्ध चट्टानों के शोध को प्राथमिकता दी जाएगी।
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