- राजदेव पांडेय
ग्वालियर किला विदेशी मुद्रा कमाने का अहम जरिया है। यहाँ आने वाले पर्यटकों से सालाना 25 हजार डॉलर (10 लाख रु.) की कमाई हो रही है। खास यह कि पर्यटकों में तीन चौथाई वीरांगना लक्ष्मीबाई की शहादत कथा के धरातल को चूमने आते हैं। वीरांगना का राष्ट्रीय समृद्धि में यह योगदान भी उनकी शहादत की तरह अनूठा ही माना जा रहा है।
किले को देखने सालाना करीब 15 हजार विदेशी पर्यटक आते हैं। इनमें अधिकतर फ्रांस, डेनमार्क, स्पेन, अमेरिकी व कोरियाई होते हैं। ये विदेशी टिकट डॉलरों से खरीदते हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टिकट खिड़की डॉलरों की चमक से इन दिनों दमकती देखी जा सकती है। एक तथ्यपरक अनुमान के मुताबिक सालाना 25 हजार डॉलर विदेशी मुद्रा की कमाई केवल तीन-चार साल से हो रही है।
उल्लेखनीय है कि किले पर देशी पर्यटक भी खूब आ रहे हैं। सैलानियों की आवक लगातार बढ़ रही है। नजर डालें, जनवरी 06 में करीब साढ़े 15 हजार घरेलू और करीब 1100 विदेशी सैलानी आए थे। | | ग्वालियर किला विदेशी मुद्रा कमाने का अहम जरिया है। यहाँ आने वाले पर्यटकों से सालाना 25 हजार डॉलर (10 लाख रु.) की कमाई हो रही है। खास यह कि पर्यटकों में तीन चौथाई वीरांगना लक्ष्मीबाई की शहादत कथा के धरातल को चूमने आते हैं। |
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2007 की जनवरी में 20 हजार से अधिक घरेलू दर्शक और 2000 से अधिक विदेशी पर्यटक आए। सन् 2007 में देशी पर्यटक डेढ़ लाख आए। वहीं विदेशी पर्यटकों की संख्या 15 हजार 601 रही। 2008 में अभी तक 100-150 विदेशी सैलानी रोजाना यहाँ आ रहे हैं।
डॉलर की तुलना में रुपए के मजबूत होने से आर्कियोलॉजिकल सर्वे विभाग के कान खड़े हो गए हैं। विदेशी पर्यटक से ग्वालियर फोर्ट पर टिकट एक डॉलर लिया जाता है। उसकी पहले से तय कीमत 45 रु. प्रति डॉलर मानकर टिकट दिया जाता है। रुपया अभी 40 के आसपास है इसलिए इन दिनों विभाग को घाटा उठाना पड़ रहा है। डॉलर जमा करने पर विभाग को कम भारतीय रुपया प्राप्त हो रहा है।
हट सकता है ग्वालियर
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के विदेशों में बहुप्रचारित पैकेज में अभी ग्वालियर शामिल हैं, पर मंत्रालय को यहाँ पर्यटन के लिए जरूरी ढाँचे का अभाव खटकने लगा है। संरचनाएँ ठीक नहीं हुईं तो ग्वालियर का नाम पैकेज से हट सकता है।
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