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साहसिक खिलाड़ी बने युवा पर्यटक
- साशा
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आज के युवाओं के लिए पर्यटन का मतलब सिर्फ घूमना-फिरना और खरीददारी करना नहीं रह गया। वे सनसनी चाहते हैं - कभी पहाड़ों से छलाँग लगाकर, कभी धधकते ज्वालामुखी के मुहाने पर चहलकदमी करके तो कभी खूँखार शार्क के दाँत गिनकर!

पर्यटन, खासतौर पर युवाओं के लिए, अब खूबसूरत वादियाँ, मखमली बर्फ, फूलों की घाटियाँ और मन मोह लेने वाले इंसानी निर्माण के नजारों को देखने का नाम भर नहीं है। पर्यटन अब खतरों से खेलने, खतरों में खुशियों को तलाशने के जुनून का नाम भी है। जी हाँ! चाहे बंजी जंपिंग हो, रिवर राफ्टिंग हो, पैराग्लाइडिंग हो या माउंटेनियरिंग, अब ये सब दुस्साहस पर्यटन का हिस्सा हैं। खासतौर पर युवाओं के।

विश्व पर्यटन संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक पर्यटन उद्योग बहुत तेजी से बढ़ रहा है और सबसे हैरान करने वाली या कहें पर्यटन उद्योग को खुश करने वाली बात यह है कि पर्यटन में सबसे ज्यादा रुचि लेने वालों में युवा वर्ग तेजी से उभरकर सामने आ रहा है। पिछली सदी के 80 और 90 के दशक में पर्यटकों की औसत उम्र 36 से 40 वर्ष के बीच थी। इस सदी की शुरुआत में यानी 2000-2001 में यह औसत उम्र घटकर 32 साल रह गई और पिछले 5-6 सालों में तेजी से कम होते हुए यह 28 से 30 साल के बीच आ गई है।
  आज के युवाओं के लिए पर्यटन का मतलब सिर्फ घूमना-फिरना और खरीददारी करना नहीं रह गया। वे सनसनी चाहते हैं - कभी पहाड़ों से छलाँग लगाकर, कभी धधकते ज्वालामुखी के मुहाने पर चहलकदमी करके तो कभी खूँखार शार्क के दाँत गिनकर!      


भारत में तो पर्यटकों की औसत उम्र और भी कम हुई है। हमारे यहाँ पर्यटन के लिए निकलने वालों की औसत उम्र 26.5 साल है। पर्यटकों की औसत उम्र घटने से बहुत कुछ बदला है। रिपोर्ट के मुताबिक कम उम्र के पर्यटक ने न सिर्फ पर्यटन के पारंपरिक रोमांच को बदलकर रख दिया है, बल्कि इसने पर्यटन के अर्थशास्त्र को भी काफी हद तक बदल डाला है। पहले जहाँ औसतन भारतीय पर्यटक एक साल में दो से ढाई हजार रुपए खर्च करता था, वहीं आज कम उम्र का यह पर्यटक औसतन 4 से 5 हजार रुपए खर्च करता है।

कम उम्र के इस पर्यटक की जहाँ खर्च करने की प्रवृत्ति में इजाफा हुआ है, वहीं इसमें पर्यटन की चाहत भी बहुत तेजी से बदली है। खासतौर पर युवा पर्यटक न तो तीर्थ स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं और न ही वे पारंपरिक किले, पुरानी इमारतें और मनोहारी घाटियाँ देखना चाहते हैं। आज के युवा पर्यटक की चाहत कुछ हटकर है, रोमांचक और खतरों भरी! युवा पर्यटक खतरों से खेलकर खुशियाँ तलाशना चाहता है।

इसीलिए उसकी पर्यटन सूची में ऐसी-ऐसी साहसिक गतिविधियाँ शामिल हो रही हैं, जिनके बारे में पहले सोचा भी नहीं जा सकता था। मसलन, आज का पर्यटक खड़े पहाड़ों पर सीधे चढ़ने का रोमांचक लुत्फ उठाना चाहता है, बंजी जंपिंग करना चाहता है और गर्म हवा के गुब्बारे में बैठकर अपने शहर को बहुत ऊँचे जाकर देखना चाहता है। एडवेंचर स्पोर्ट्स भी पर्यटन की नई सूची का हिस्सा बन रहे हैं।

यही वजह है कि आज के युवा पर्यटक की पर्यटन किट बदल गई है। उसकी किट में न तो ढेर सारे गर्म कपड़े, मिठाइयाँ और लौटते समय खरीदकर लाई गई एंटिक्स होती हैं और न ही वह पर्यटन के नाम पर खूबसूरत समुद्री किनारों पर सिर्फ चहलकदमी भर करना चाहता है। आज का पर्यटक जब अपनी यात्रा पर निकलता है तो उसके बैग में या कहें उसकी किट में ऐसी चीजें होती हैं जैसी चीजें एक जमाने में शिकारियों के पास होती थीं।
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