कालिंपांग पश्चिम बंगाल के सुदूर अंचल में स्थित एक सुंदर क्षेत्र है। यहाँ बर्फ के आवरण में ढँकी हरियाली सूर्य की रोशनी में चमक उठती है। सितंबर से लेकर अप्रैल तक इस स्थल पर अनेक पर्यटक भ्रमण करने आते हैं। यहाँ आकर पर्यटकों को ऐसा लगता है कि जिंदगी की दौड़-धूप से बचकर क्यों न यहीं पर आशियाना बना लें। कालिंपांग का पहाड़ी इलाका गंगटोक एवं सिलीगुड़ी क्षेत्र के मध्य स्थित है।कालिंपांग पहाड़ी स्टेशनपश्चिम बंगाल की खाड़ी में स्थित कालिंपांग खूबसूरत नगर है। वहाँ पर बौद्ध धर्म से जुड़े बहुत से मठ हैं। मुख्य रूप से मठ तिब्बत की संस्कृति, भाषा एवं परंपरा को दर्शाते हैं। इस पहाड़ी क्षेत्र के निवासी हिमालयीन भाषा बोलते हैं। यहाँ पर्यटक नौका विहार में नदी की खूबसूरती का आनंद उठा सकते हैं। सन् 1892 में याथोंगा गोम्पा नामक मठ यहाँ निर्मित किया गया था। इस मठ की अद्भुत सुंदरता को देखकर सभी दंग रह जाते हैं। गोम्पा मठ में प्रवेश करते ही दीवारों पर अंकित सुंदर चित्रकला अनायास ही पर्यटकों का ध्यान आकर्षित कर लेती है। अक्सर पर्यटक यहाँ पर स्थित बाजार में टहलकर विभिन्न आकर्षक चीजों को खरीदते देखे जाते हैं। यहाँ के ऑर्किड के फूल विश्वभर में अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं। इसी वजह से इन्हें दूसरे देशों में निर्यात किया जाता है। हस्तशिल्प से बने अनोखे पर्स, गहने, बैग, पीतल के बर्तन एवं तस्वीरें पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं। दंबर चौक पर आपको अनेक दुकानें मिलेंगी जहाँ पर इन अनोखी वस्तुअओं को खरीदा जा सकता है। कालिंपांग से पर्यटक कंचनजंघा पहाड़ की खूबसूरती को भी निहार सकते हैं।कालिंपांग में सबसे प्रसिद्ध स्थल हैं दुर्पिन दारा और डॉ. ग्राहम्स होम। डॉ. ग्राहम्स होम में चर्च और स्कूल स्थित है। इस स्कूल को सन् 1925 में निर्मित किया गया था। स्कूल के नजदीक स्थित है दिओला पहाड़। इस पहाड़ से पूरे कालिंपांग की खूबसूरती का नजारा देखा जा सकता है। दुर्पिन दारा मठ के नजदीक गोल्फ कोर्स स्थित है। गोल्फ क्रीड़ा में रुचि रखने वाले असंख्य पर्यटक मनोरंजन के लिए यहाँ आते हैं। अनेक होटल एवं निवास स्थान हैं जहाँ पर भ्रमण पर आए पर्यटक ठहर सकते हैं।कैसे पहुँचें कालिंपांग जाने के लिए गंगटोक एवं सिलीगुड़ी से बसें उपलब्ध हैं। 3 से 4 घंटे की यात्रा कर कालिंपांग पहुँचा जा सकता है। अन्य स्थानों से सिलीगुड़ी ट्रेन के माध्यम से पहुँच सकते हैं। |
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