राजस्थान की कड़क धूप से राहत पाने के लिए माउंट आबू पर्यटकों के लिए कश्मीर से कम नहीं है। हरियाली के मध्य यहाँ के पहाड़ों की खूबसूरती मन को मोह लेती है। कहा जाता है कि माउंट आबू चौहान शासन का अभिन्न अंग था। इतिहास माउंट आबू के इतिहास पर विभिन्न कथाएँ प्रचलित हैं। कहा जाता है कि भारत में संत, महापुरुष यहाँ के पहाड़ों में निवास करते थे। मान्यता है कि हजारों देव, ऋषि-मुनि स्वर्ग से उतरकर इन पहाड़ों में निवास करते थे। ऋषि वशिष्ठ ने पर्वत पर यज्ञ आयोजित किया था। मुख्य आकर्षक स्थल गोमुख मंदिर इस मंदिर में भगवान राम की पूजा-अर्चना भक्ति और श्रद्दा से की जाती है। मंदिर में विशेषकर संगमरमर पत्थर से बनी गाय की मूर्ति के मुँह से फव्वारे निकलते हैं। हिंदू धर्म की रीतियों के अनुसार इस स्थान पर अग्निकुंड स्थित था। गोमुख मंदिर माउंट आबू से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।दिलवरा जैन मंदिरदिलवरा मंदिर बहुत ही खूबसूरत और भव्य स्थल है। यहाँ संगमरमर पर सुंदर कलाकृतियों को उकेरा गया है। सन् 1031 में निर्मित दिलवरा मंदिरों में विशेष स्थान पर है विमल वाशी मंदिर। यह सबसे पौराणिक मंदिर है। बाद में सन् 1231 में तेजपाल मंदिर भगवान नेमीनाथ को अर्पित है।सूर्यास्त स्थल (सनसेट पॉइंट) सूर्यास्त के समय यह स्थल बहुत ही सुंदर लगता है। इस दौरान सूर्य की लालिमा चारों ओर छा जाती है। प्रकृति की इस सुंदरता को देखकर हजारों पयर्टकों का मन मोहित एवं रोमांचित हो उठता है। ट्रेवोर्स टैंक घने जगलों में स्थित इस स्थान को निहारने हजारों पर्यटक आते हैं। इन जंगलों में असंख्य पक्षी रहते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए यह स्थान बहुत उपयुक्त है। कैसे पहुँचें राजमार्ग जयपुर, उदयपुर, दिल्ली, अजमेर से बस पर्यटकों को सीधे माउंट आबू पहुँचाती है। वायुमार्ग माउंट आबू के पास स्थित उदयपुर डावोक हवाई अड्डा प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। डावोक हवाई अड्डे के पास बस स्टैंड से बस सेवा ली जा सकती है। रेलमार्ग माउंट आबू के निकट आबू रोड स्टेशन पर पर्यटक पहुँच सकते हैं। |
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