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कुदरती सुंदरता का प्रतीक : कूर्ग
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मैसूर से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कूर्ग हिल स्टेशन प्राकृतिक खूबसूरती का प्रतीक है। यह स्थल प्राकृतिक सुंदरता से ओत-प्रोत है। यह दक्षिण भारत की प्रसिद्ध कावेरी नदी का उद्‍गम स्थल है

आकर्षक स्थल
कूर्ग में अनेक गाँव बसे हुए हैं। इन गाँवों को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी पोस्टकार्ड पर खूबसूरत तस्वीर देख रहे हों। इस क्षेत्र में विशेष पर्यटक स्थल मंधहेरी किला है।

इस किले का निर्माण 19 वीं सदी में हुआ था। इस किले में प्रवेश करते ही पर्यटक संग्रहालय में कूर्ग के इतिहास से परीचित होते हैं। संग्रहालय में राजा-महाराजाओं एवं अँग्रेजों के समय प्रयोग किए गए अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं। वहाँ पर खूबसूरत चित्रकला भी देखी जा सकती है।

सन् 1820 में स्थापित किया गया भगवान शंकर का ओंकारेश्वर मंदिर शिवभक्तों के आकर्षण का केंद्र है। असंख्य श्रद्धालु मंदिर में भगवान शिव की आराधना करते हैं। मान्यता है कि यहाँ सारी मनोकामनाएँ भगवान पूर्ण करते हैं।

कूर्ग से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भागामंडला मंदिर में भी हजारों श्रद्धालुजन भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। इस मंदिर की विशेषता है कि इसके ऊपरी भाग पर एक विशाल घड़ी लगी हुई है।

पर्यटक पदयात्रा करने टाडेवेनडामेल पहाड़ की खूबसूरत वादियों में जाते हैं। इन खूबसूरत वादियों में मन रोमांचित हो उठता है और ऐसा महसूस होता है कि इन वादियों की प्राकृतिक सुंदरता में वे कहीं खो गए हों।

वन्यजीवों को चाहने वाले पर्यटक नागरहोल नेशनल पार्क की सैर जरूर करते हैं। इस अभयारण्य में विभिन्न प्रकार के जीव, पक्षी स्वच्छंद रूप में विचरण करते नजर आते हैं

किस समय जाएँ
नवंबर से लेकर अप्रैल तक पर्यटक और श्रद्धालु यहाँ का भ्रमण कर सकते हैं।

कैसे पहुँचें
वायुमार्ग- कूर्ग के सबसे निकट बेंगलुरु हवाईअड्डा है। यह कूर्ग से 196 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

राजमार्ग- कूर्ग, बेंगलुरु-मैसूर राजमार्ग से जुड़ा हुआ है।

रेलमार्ग- कूर्ग पहुँचने के लिए मैसूर रेलवे स्टेशन सबसे निकट है।
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