नेहा मित्तल
पुस्तकालय में एक पुरानी किताब रखी हुई थी। जिसके पन्ने पुराने हो गए थे। किताब को खोल कर के मैं धुँधले ऐतिहासिक लेख को पढ़ने का प्रयास कर रही थी। किताब में लद्दाख के प्राकृतिक सौंदर्य का विवरण करते हुए बताया है कि धरती और आसमान एक साथ यहाँ पर मिल जाते हैं।
वहाँ की घाटियों से बात करते हुई ठंडी हवाएँ बहती रहती है। नीले गगन छत्र के नीचे ऋषि-मुनि, आध्यात्मिक रूप से बैठे रहते हैं। पथरीली धरती पर पर्वत आसमान के छूने की कोशिश करते हैं। खूबसूरती का स्थल लद्दाख को देखने को मेरी उत्सुकता बढ़ गई। मैंने निर्णय लिया कि सहेलियों के साथ लेह एवं लद्दाख जाऊँगी।
लद्दाख जम्मू एवं कश्मीर का सबसे बड़ा क्षेत्र। किसी कविता की तरह उसकी खूबसूरती थी। उत्तर दिशा की ओर देखते हैं तो काराकोरम पर्वत की श्रृंखला वर्णमाला की तरह पृथ्वी का हार बनी है। उसी प्रकार दक्षिण दिशा में हिमालय पर्वत की श्रृंखला हैं। जीप से जब हम लद्दाख पहुँचे तो थोड़ी ही दूर पर स्थित इंदू नदी थी। पानी की बूँदें सूर्य के प्रकाश से झिलमिला रही थी मानों जैसे मोती चमक रहे हो।
बर्फ ने पर्वतों को अपने कवच में बाँध लिया था एवं पथरीली धरती ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ रखी थी। यह वह क्षेत्र है जहाँ पर बर्फ कभी पिघलती नहीं है। लद्दाख समुद्र तल से 4,600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। भगवान स्वर्ग से पृथ्वी पर उतर कर आए थे तब लद्दाख के शांतिपूर्ण वातावरण में ही उन्होंने निवास किया होगा। भगवान बुद्ध ध्यान पर इस स्थान पर बैठे थे। यहाँ का प्रसिद्ध मठ है गोम्पा।
| | हेमिस गोम्पा ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित है। यह लेह क्षेत्र से लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है। मठ की विशालता एवं गर्भगृह से आ रही घाटियों की आवाज हमें आकृष्ट कर रही थी। |
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हेमिस गोम्पा ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित है। यह लेह क्षेत्र से लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है। मठ की विशालता एवं गर्भगृह से आ रही घाटियों की आवाज हमें आकृष्ट कर रही थी। लकड़ी के बने बरामदे के पास बने दरवाजे पर बड़े गोल आकृति की वस्तु लटकी हुई थीं। दरवाजे खुले हुए थे एवं भक्त शांतिपूर्वक ध्यानमग्न बैठे हुए थे। बौद्ध धर्म के लामा कुशाक प्रार्थना कर रहे थे। प्रार्थना सभा में धूप की सुगन्ध मन को मोहित कर रही थी। वहाँ पर बैठकर हमें ऐसा एहसास हो रहा था कि हम पृथ्वी से दूर कहीं दूर अन्य ग्रह में थे।
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