यहाँ पर विभिन्ना रंगों के फूलों के पौधे हैं जिनमें गुलाब प्रमुख है। नदी में बोटिंग की व्यवस्था भी है। आधा किलोमीटर से भी ज्यादा के क्षेत्र में फूलों की बहार देखकर इसका नाम सार्थक लगा। रात्रि विश्राम के बाद हम तैयार होकर मुन्नार से तेरह किलोमीटर दूर स्थित मट्टूपेट्टी डॅम के लिए रवाना हुए।
यह बाँध पहाड़ों से बहकर आते हुए पानी को रोकने के लिए बनाया गया है। इससे एक बहुत बड़ी झील तैयार हुई है, जहाँ पर स्पीड बोट, पैडल बोट व साधारण बोट की सुविधा है। यह झील अत्यंत गहरी होने के कारण सुरक्षा की वजह से लाइफ जेकेट्स पहनने की सुविधा मिलती है। इसी दिशा में आगे बढ़ने पर एक और कृत्रिम झील है, जो कुंडला डॅम के कारण तैयार हुई है। यहाँ पास ही में एक गोल्फ कोर्स है जो टाटा टी इस्टेट की संपत्ति है। वापस मुन्नार की दिशा में आते समय बड़े-बड़े चारागाह दिखे जो इंडो-स्विस पशुपालन विभाग के अधीन हैं।
| | यहाँ के बाजार में अनेक प्रकार के फल व मसाले उचित दामों पर मिल जाते हैं। कुछ लोग खरीददारी को पर्यटन का ही एक हिस्सा मानते हैं, सो हमने भी मसालों और फलों की खरीददारी की।
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यहाँ से मुन्नार होते हुए हम राजामलाई क्षेत्र गए। इस क्षेत्र में जाने के लिए केरल टूरिज्म डिपार्टमेंट की विशेष बसें उपलब्ध रहती हैं। तेरह किलोमीटर के रास्ते में चाय बागान व दो बहुत ही चौड़े जलप्रपात दिखाई देते हैं। ऊँचाई पर पहुँचने पर पता चला कि बसें निर्धारित स्थान पर रूकेंगी। पहाड़ की चोटी पर पहुँचने के लिए आगे का रास्ता पैदल तय करना होगा, लेकिन पर्यटन का उत्साह इतना जर्बदस्त रहता है कि मनुष्य अपनी तकलीफें भूल जाता है। यह स्थान जंगली बकरियों के लिए प्रसिद्ध है।
उनकी घटती हुई संख्या को देखते हुए इस स्थान को सरंक्षित किया गया है। इस स्थान को देखने के पश्चात हम मुन्नार लौट आए। यहाँ के बाजार में अनेक प्रकार के फल व मसाले उचित दामों पर मिल जाते हैं। कुछ लोग खरीददारी को पर्यटन का ही एक हिस्सा मानते हैं, सो हमने भी मसालों और फलों की खरीददारी की।
मुन्नार हमें इसलिए भी बहुत अच्छा लगा क्योंकि यहाँ पर इंदौर में मिलने वाले खाद्य पदार्थ जिनमें पोहा प्रमुख है, आसानी से मिल जाते हैं। रहने के लिए हर स्तर के होटलों के अलावा निजी घरों में भी उचित शुल्क पर ठहरा जा सकता है। हर पर्वतीय स्थल की तरह यहाँ पर भी ठंड बहुत होती है विशेषकर रात्रि और भोर में। अतः गरम कपड़े लेकर चलना ठीक होता है।
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