औली के आनंद में और अभिवृद्धि बाकी थी, हम औली में स्नो कार्टिग का आनंद ले ही रहे थे, तभी बादल घिर आए और आसमान से मानो जैसे रूई के फोए नर्म बर्फ के रूप में गिर रहे थे। प्रकृति के इस रूप ने हमारे रोमांच को द्विगुणित कर दिया। हमने नेपाली लोकगीतों की धुन पर वहाँ के रहवासियों के साथ बर्फ के बीच अलाव जलाकर डांस किया।
डांस के बाद नजरे उठाकर देखा तो देवदार के सभी वृक्ष बर्फ से ढँक चुके थें। औली में रूकने के लिए दो होटल हैं एक गढवाल पर्यटन निगम का एवं दूसरा आईटीसी का। जो लोग सुंदर एवं शांत वातावरण के शौकीन हैं, उन लोगों के लिए हिमालय की गोद में बसा औली से अच्छा कोई विकल्प नहीं हो सकता है।
हमने अस्थाई रूप से जोशीमठ में पूजन हेतु स्थापित भगवान बद्रीनाथ के मंदिर के दर्शन भी किए। जब बद्रीनाथ में ६ माह के लिए पट बंद कर दिए जाते हैं, तब भगवान बद्रीनाथ की पूजा जोशीमठ में स्थित नृसिंह मंदिर में की जाती है। जोशीमठ में दर्शनार्थ शंकराचार्य का प्राचीन मंदिर एवं यहाँ से २० किमी दूर 'तपोवन' स्थान है, जहाँ गर्म पानी का कुंड हैं। हमने जोशीमठ से सुबह जल्दी ही ऋषिकेश की ओर कूच किया। ऋषिकेश में राम-लक्ष्मण झूला एवं प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करने के पश्चात रात्रि विश्राम ऋषिकेश में ही किया।
अलसुबह हम देहरादून-मसूरी की ओर रवाना हुए। देहरादून में सहस्त्रधारा की सुंदरता ने सभी का मन मोह लिया। मसूरी के केम्पटी फाल का पर्यटक काफी संख्या में लुत्फ ले रहे थें। मसूरी में माल-रोड पर घुमने पर वहाँ की स्वच्छता और व्यवस्थित बनावट का नजारा देखते ही बनता हैं। मसूरी से सायंकाल ही प्रस्थान कर हम हरिद्वार पहुँचे। रात्रि विश्राम हरिद्वार में कर सुबह इंदौर के लिए प्रस्थान किया।
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