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प्रकृति का नजराना महाबलेश्वर
महाबलेश्वर के पास प्रतापगढ़ किला है, जिसका ऐतिहासिक महत्व भी है। इसी किले में छत्रपति शिवाजी ने बीजापुर सरदार अफजल खान से मुलाकात कर उसे मौत के घाट उतारा था। इस किले के ऊपरी हिस्से से कोंकण घाटी बहुत सुंदर दिखाई देती है। यहाँ शिवाजी की एक शानदार प्रतिमा भी है। एक अन्य खूबसूरत स्पॉट वेण्णालेक है। यहाँ बोटिंग, फिशिंग, राइडिंग तथा गेम्स के स्टॉल्स हैं।

तपोला को मिनी कश्मीर कहा जाता है। यहाँ जाने के लिए एक दिन लगता है। यहाँ कोयना डैम के बैक वॉटर पर बनी झील बहुत सुंदर है। यहाँ पर्यटक नौका विहार का खूब आनंद लेते हैं। यहाँ पास ही वासोटा का किला है, जहाँ अत्यंत घने जंगलों के बीच सीधी चढ़ाई कर के पहुँचा जा सकता है। यह स्थान ट्रेकिंग करने वालों के आकर्षण का केंद्र है।

पंचगनी के पास टेबललैंड के नाम से मशहूर पठार है। 60 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाने वाला यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पठार है। यहाँ से पंचगनी शहर बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

लॉडविक प्‍वॉइंट तक पहुँचने का मार्ग बहुत ही सुंदर है। घने जंगलों के बीच चलते हुए रोमांच होता है। यहाँ से प्रतापगढ़ का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। अम्बानेली के टेढ़े-मेढ़े रास्ते बहुत सुंदर दिखाई देते हैं। यहाँ से एक एलीफेंट हेड दिखाई देता है। इनके अलावा रॉबर्स केव्स, रोसमण्ड रॉक, पारसी प्‍वॉइंट, लिंगमाला वॉटर फॉल सभी बहुत सुंदर हैं।

महाबलेश्वर तथा पंचगनी स्ट्राबेरी, रास्पबेरी, मलबरी, चैरी आदि की खेती के लिए मशहूर हैं। यहाँ कई मशहूर कंपनियों की जैम फैक्टरियाँ हैं। यहाँ से पर्यटक जैम, जेली, फ्रूटक्रश, फज आदि खरीद कर ले जाते हैं। यहाँ की स्ट्राबेरी-क्रीम आइसक्रीम पर्यटकों को बहुत पसंद आती है। महाबलेश्वर की चप्पलें भी यहाँ की विशेषता हैं। क्रोशिया से बने कुर्ते, स्कर्ट्‌स तथा पोंचू भी यहाँ बहुत सुंदर मिलते हैं। यहाँ की चना चिकी भी विशेष होती है।
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