यह करीब एक किमी लंबा है। भुटानी इसे 'टस ओमेगो' यानी बर्फ का तालाब कहते हैं। स्वच्छ प्रदूषणरहित काँच सा पारदर्शक शांत निश्चल पानी, आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब अपने में समाए हुए।
पहाड़ व पानी एक-दूसरे में ऐसे समाहित थे कि उनकी सीमा-रेखा पहचानना कठिन था। मंत्रमुग्ध होकर तालाब को निहारना एक अद्भुत अनुभव था। यहाँ पर्यटकों के मनोरंजन के लिए तिब्बती 'यॉक' लाए गए हैं। बड़े सिंग, बड़ी डरावनी आँखें, विशाल शरीर, घने काले बाल जैसे कोई कंबल ओढ़ा हो। पर्यटक इस पर बैठकर सवारी का आनंद भी लेते हैं।
कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए पास की गुमटियों पर जैकेट्स, गमबुट्स, दस्ताने आदि मिलते हैं। हम भी कहाँ पीछे रहने वाले थे? इन्हीं कपड़ों से सज-धजकर बर्फबारी का आनंद लेने चल पड़े।
हमारे चारों ओर बर्फ बिछा था। बर्फ के गोले एक-दूसरे पर फेंकने का आनंद लिया, तब कोई बड़ा था न कोई छोटा। ऐसा बर्फीला अनुभव हमने अपने दिमाग के कम्प्यूटर में इकट्ठा कर लिया और दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर लिया।
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