दक्षिण भारत के बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल का नाम है - ऊटी। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर ऊटी समुद्रतल से 7,349 फुट ऊँचाई पर बसा है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को अभिभूत कर देता है। लंबी दूरी तय कर यहाँ आए पर्यटक यहाँ के चाय-कॉफी बागानों से आ रही ताजी महक सूंघते ही तरोताजा हो जाते हैं।
ऊटी में पहले-पहल टोंगा आदिवासियों का गढ़ था। जब अंग्रेज हिंदुस्तान आए तो उन्होंने ऊटी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया। साथ ही रेल लाइन बनने के बाद मद्रास प्रेसीडेंसी न इसे गमिर्यों में अपनी राजधानी बना लिया। यहाँ बरतानियाँ शासनकाल के कई खूबसूरत निर्माण गेस्टहाउस के रूप में आपका स्वागत करते नजर आएँगे।
1848 में बनाया गया बोटेनिकल गार्डन आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ अलग-अलग प्रजातियों के पौधों की कई किस्में उपलब्ध हैं। हर वर्ष मई के महीने में यहाँ फूलों की खूबसूरत प्रदर्शनी लगाई जाती है। शहर से 3 किलोमीटर दूर ऊटी झील है। इसी झील के नाम पर शहर का नामकरण किया गया है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह झील प्रकृति निर्मित न होकर इंसानों द्वारा बनाई गई है। इसका निर्माण कोयम्बटूर के कलेक्टर जान सुलीवन ने करवाया था।
यहाँ आप घुड़सवारी और नौकायान का लुफ्त उठा सकते हैं। छोटे-छोटे डिब्बे वाली गाड़ी में बच्चे घूम सकते हैं। लेक गार्डन से बना सुंदर बाग पर्यटकों के पसंदीदा स्थान में से एक है। आप यहाँ की दोड्डाबेट्टा पहाड़ी घूमना न भूलें। यह ऊटी से लगभग दस किलोमीटर दूर है। सागर तल से 2,623 मीटर ऊँची इस पहाड़ी से पहाड़ों, घाटियों और पठारों के नयनाभिराम दृश्य निहारना बेहद खूबसूरत अनुभव है। यहाँ इन्हें निहारने के लिए दूरबीन का प्रबंध किया गया है।
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