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शूटिंग स्पॉट बने टूरिस्ट स्पॉट
-कीर्ति सारस्वत

नाहरगढ़ का किला
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बच्चों की छुट्टियाँ खत्म होने में अब कुछ ही वक्त रह गया है। अगर अभी तक आप दिल्ली से बाहर कहीं घूमने नहीं निकले तो निकल पड़िए। हम आपको बताते हैं कि जिन जगहों पर फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है वे जगहें आपके बच्चों को जरूर पसंद आएँगी। जरा सोचिए आप उस महल में हैं जहाँ जोधा ने अकबर से प्यार भरी बातें की थीं। कैसा लगेगा अगर आपकी भी वैसी ही तस्वीर आपके ड्रॉइंग रूम में टंगी हो।

आप सोच रहे होंगे कि ये क्या बात हुई पर यह अब एक नई तरह का पर्यटन बनता जा रहा है। आजकल लोग उन जगहों पर जाना पसंद करने लगे हैं जहाँ किसी फिल्म की शूटिंग हुई हो। हाल ही में आई कई फिल्मों के सेट इस बात की गवाही देते हैं। रील पर फिल्माए गए ये रियल लोकेशन पर्यटकों को बहुत लुभा रहे हैं। टूर ऑपरेटरों ने इसमें नई संभावनाएं देखकर इस पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है।

लुधियाना का दर्शनीयस्थल
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अब शूटिंग के बाद सेट महज सेट नहीं रहता बल्कि बॉलीवुड फैंस के लिए टूरिस्ट स्पॉट बन जाता है। मिसाल के तौर पर लें तो 'जोधा-अकबर' की शूटिंग जहाँ हुई उन किलों और महलों को देखने आने वालों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी गई। कई पर्यटन एजेंसियाँ भी इस मौके को भुनाने में लगी हैं। हाल ही आई एक और फिल्म 'गुलाल' के लोकेशन ने भी पर्यटकों को आकर्षित किया है। 'गुलाल' की शूटिंग जयपुर के पास स्थित चोमु पैलेस में हुई थी।

'रंग दे बसंती' की शूटिंग अमृतसर, लुधियाना और साहनेवाल की कुछ जगहों पर हुई थी। फिल्म की रिलीज के बाद ये स्थान भी पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए। ट्रेवल एजेंसियों ने इसे 'आरडीबी पैकेज' का नाम देकर लोगों को आकर्षित किया।

टूरिस्ट इस बात से रोमांचित हुए कि वे उन जगहों पर जाएँगे जहाँ फिल्म के दृश्य फिल्माए गए। इनमें दोराहा चौक, किला आदि थे। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर तो काफी फिल्मों में दिखाया जा चुका है। यह पैकेज कोई ज्यादा महँगा भी नहीं था।

जोधा अकबर का सेट
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कुछ ऐसा ही फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के समय भी हुआ था पर उस समय किसी पर्यटन एजेंसी ने इस तरह की कोई कोशिश नहीं की थी। इस फिल्म का एक सेट शीशमहल का था जिसमें मधुबाला पर एक ऐतिहासिक गीत 'प्यार किया तो डरना क्या' फिल्माया गया था। यह उस वक्त का सबसे कीमती सेट था। इसे बाद में तोड़ा नहीं गया और लोगों के लिए खोल दिया गया था।

ऐसा ही कुछ फिल्म 'जोधा-अकबर' के साथ हुआ, जब फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद भी इसके सेट नहीं तोड़े गए और दर्शकों-पर्यटकों के लिए खुले रखे गए। ऐसे फिल्मांकन के बाद तो राजस्थान के भव्य महल और किले वाकई में किसी के जहन में उतर जाएँ।

फिल्म 'निःशब्द' में दर्शाए गए मनोहारी दृश्य शिमला, मनाली और नालदेहरा के विभिन्न स्थलों के हैं। भले ही फिल्म दर्शकों के गले नहीं उतरी हो पर फिल्म के खूबसूरत दृश्य लोगों के दिलो-दिमाग में उतर गए। हालिया आई फिल्मों की बात करें तो 'दिल्ली ६', 'चाँदनी चौक टू चाइना' और 'देव डी' जैसी फिल्मों ने देश की राजधानी दिल्ली को भी एक नया चेहरा दिया और तो और, एजेंसियों ने 'स्लमडॉग मिलिनेयर' की सफलता के बादे धारावी को भी एक टूरिस्ट स्पॉट के तौर पर प्रमोट कर दिया है।

एनआरआई भी हुए दीवाने :
भारतीय फिल्मों के दीवाने भारत के बाहर भी काफी संख्या में हैं। इनमें आप्रवासियों की संख्या अच्छी-खासी है। भारतीय फिल्मों के लोकेशन देखकर आप्रवासियों ने भी कई टूर एजेंसियों से संपर्क किया है। वे खास तौर पर "जोधा-अकबर" और 'गुलाल' के सेट से प्रभावित हुए हैं।
इस मामले में राजस्थान सबसे आगे है। तो अब किसका इंतजार है? बैग पैक कीजिए और निकल पड़िए अपने फेवरेट फिल्म स्टार की फिल्मों के सेट पर टूर के लिए। बाजार तो तैयार है, बस आप के ग्राहक बनने की देर है।

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