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प्रकृति के हाथों सजा मलेशिया
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इसके बाद हम नाव से पहुँचे लेक ऑफ द प्रेगनेंट मैडन पर। यह मीठे पानी की झील दो द्वीपों के बीच बनी है। इसका पानी भी एकदम साफ और स्वच्छ है। यहाँ पर बोटिंग करने की व्यवस्था भी है। यहाँ लगभग डेढ़ घंटा व्यतीत करने के बाद हम पहुँचे समुद्री चीलों के बीच।

यहाँ समुद्री व पहाड़ी दोनों तरह की चीलों को आप खाना खिला सकते हैं। तत्पश्चात हम जमीन पर पहुँचे, खाना खाया और अंडरवाटर वर्ल्ड में पैंगुइन देखने पहुँचे। यहाँ थ्री डी फिल्म भी बताई जाती है।

शाम के समय बटिक प्रिंट के संबंध में जानकारी लेने के बाद होटल पहुँचे। सफर के आखिरी दिन पुनः समुद्र के बीच थे जहाँ दिन की शुरुआत बंदरों को ब्रेड खिलाने से आरंभ हुई। समुद्र के बीच बने फिश फार्म में मछलियों की विभिन्न प्रजातियाँ देखने के बाद मगरमच्छों के रहने के स्थान को दूर से ही देखा। तट पर आने के बाद हमें दो घंटे के लिए शॉपिंग के लिए दिए गए थे और वह भी मॉल में।

खरीददारी के पश्चात हम पहुँचे केबल कार में बैठने के लिए। केबल कार के माध्यम से लगभग 100 मीटर की ऊँचाई पर पहुँचा जाता है। यहाँ पहुँच कर जो दृश्य नजर आता है वह अविस्मरणीय है। ऐसा लगता है कि हाथ लगाकर आसमाँ को छू लें। केबल कार से उतरने के बाद भी थोड़ी और ऊँचाई पर जाने के लिए सीढि़याँ बनाई गई हैं।
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सीढि़याँ चढ़ते समय दम फूलने लगता है, परंतु ऊपर पहुँचने के बाद थकान और पसीने की बूँदों की ओर ध्यान नहीं जाता... सूरज व समुद्र मिलकर ऐसा चमत्कार पैदा करते हैं कि मानव मन बस सुधबुध खोकर इन्हें देखने लग जाता है।

इतनी ऊँचाई पर आने के बाद लोगों के इस दृश्य को देखने के अपने पैमाने होते हैं किसी को आध्यात्मिक अनुभूति होती है तो कोई दृश्य को देखकर आँसू बहाते हुए भी देखा जा सकता है। मलेशिया यात्रा का यह अंतिम पड़ाव था जो आँखों के सामने अब भी घूम रहा है।

केबल कार से पुनः वापस नीचे आने के बाद एहसास हुआ कि मलेशिया यात्रा संपन्न हो चुकी है। यह विचार मन में आते ही अपने देश की याद आना लाजमी था और मन में लग रहा था कि कब दूसरे दिन का सूरज आसमान पर चढ़ेगा और हम हवाई अड्डे पहुँचेंगे। लंकावी अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बोर्डिंग पास लेते हुए ढेर सारी खुशी भी हो रही थी और यह भी लग रहा था कि अगर मलेशिया पुनः आना हुआ तब लंकावी जरूर आएँगे।
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