दूर-दूर तक फैली रेत सूरज की रोशनी में और भी दमकने लगती है और यह सुनहरी आभा बिखेरने वाला भव्य नजारा है थार मरुस्थल के सबसे खूबसूरत शहर जैसलमेर का, जहाँ बलुआ पत्थरों से तराशे गए विशाल महलों से घिरे इस शहर की खूबसूरती देखते ही बनती है। यही वजह है कि जैसलमेर को ‘गोल्डन सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है।
सँकरी गलियों वाले जैसलमेर के ऊँचे-ऊँचे भव्य आलीशान भवन और हवेलियाँ सैलानियों को मध्यकालीन राजशाही की याद दिलाती हैं। शहर इतने छोटे क्षेत्र में फैला है कि सैलानी यहाँ पैदल घूमते हुए मरुभूमि के इस सुनहरे मुकुट को निहार सकते हैं। माना जाता है कि जैसलमेर की स्थापना भाटी राजपूत, राव जैसल ने 12 वीं शताब्दी में की थी। इतिहास की दृष्टि से देखें तो जैसलमेर शहर पर खिलजी, राठौर, मुगल, तुगलक आदि ने कई बार आक्रमण किया था। इसके बावजूद जैसलमेर के शाही भवन राजपूत शैली के सच्चे द्योतक हैं।
मुख्य आकर्षणः-
जैसलमेर फोर्ट- सुनहरी आभा बिखेरता जैसलमेर फोर्ट इस शहर की पहचान है। स्कॉटलैंड के खूबसूरत किलों को मात देते इस किले का निर्माण भाटी वंश के राणा जैसल ने 1156 में करवाया था। बलुआ पत्थरों से बने इस भव्य किले में 99 बुर्ज बने हैं। किले के चार प्रवेश द्वार हैं, जिन्हें गणेश पोल, सूरज पोल, भूत पोल और हवा पोल के नाम से जाना जाता है। यह किला राजपूती स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। किले के अंदर न सिर्फ मंदिर, प्रशासनिक भवन, कुएँ, दुकानें हैं, बल्कि यहाँ सँकरी गलियों का जाल-सा बिछा हुआ है।
हवेलियाँ- पुराने समय के खूबसूरत और बड़े भवनों को हवेलियों के नाम से पहचाना जाता था। जैसलमेर में ऐसी कई हवेलियाँ हैं। इनमें से कुछ 200 सालों से ज्यादा पुरानी हैं, लेकिन इतनी पुरानी होने के बाद भी इनकी चमक देखने लायक है। इन हवेलियों की खासियत इनके नक्काशीदार खिड़की-दरवाजे, छज्जे और चौड़े परिसर हैं।
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