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स्थायी दाढ़ी...  Search similar articles
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एक बार एक बैठक में शहरी और ग्रामीण इलाकों के विकास और कई रचनात्मक कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई और कई अहम फैसले भी लिए गए।

योजनाओं के क्रियान्वयन की रूपरेखा को समझाते हुए अचानक नौजवान कार्यकर्ताओं के चेहरे देखकर नेहरूजी बोले- देखो भाई! दाढ़ी वगैरह बढ़ाकर कोई देहात में प्रचार करने नहीं जाएगा।

इस पर सभी की दृष्टि बैठक मैं मौजूद राजर्षि पुरुषोत्तम टंडन पर पड़ी जिनकी पहचान ही उनकी लंबी-सी दाढ़ी थी।

सकपकाते हुए उन्होंने अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरा और बोले- अरे भाई, यह सरकुलर स्थायी दाढ़ी के लिए नहीं है। उनकी इस बात पर बैठक स्थल ठहाकों से गूँज उठा।
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