- अशोक चक्रधर
चिड़ियाघर का चौकीदार जागा, तो पाया कि अंदर से एक बंदर निकल भागा। बंदर था नायाब, और कीमती बेहिसाब, इसलिए रिपोर्ट लिखवाई गई पुलिस में, पुलिस ने भी काफी दिलचस्पी ली इसमें। बहुत दिनों चला खोज का सिलसिला पर बंदर नहीं मिला, नहीं मिला, नहीं मिला।
फिर एक अंतरराष्ट्रीय बंदर अन्वेषण आयोग बिठाया गया, दुनिया भर के पुलिस विशेषज्ञों को बुलाया गया। अन्य बंदरों से भी पूछा उनके साथियों से पूछा तलाश में लग गया तंत्र समूचा।
आधुनिकतम विधियों से वैज्ञानिक प्रविधियों से जमकर खोज हुई, चौबीसों घंटे हर रोज हुई पर बंदर फरार का फरार, विदेशी विशेषज्ञों ने मान ली हार। दिखा दी लाचारी, तब इनाम रखा गया भारी।
इंस्पेक्टर बौड़मसिंह आए आगे, उन्होंने बंदर बरामद करने के लिए सिर्फ तीन घंटे माँगे। थानेदार को सैल्यूट मारा, और कर गए किनारा।
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