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रंग नहीं चढ़ता मुखौटों पर
- महेन्द्र सांघी
ND

सुना था कि होली के दिन
दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं।
रंगों से लैस होकर हम निकले
सोचा, दुश्मनों से होली खेल आते हैं।

न उन पर रंग चढ़ा, न हम पर
सभी बेरंग ही घर लौटे
हमारी तरह उन्होंने भी चेहरे पर
पहन रखे थे दोस्ती के मुखौटे।
और भी
अस्पताल में होली
मुबारक होली के ये रंग
हाय-हाय रे महँगाई...
अब तक साठ...
संसद
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