उपदेशक और श्रोता

एक बार एक उपदेशक ने अपने श्रोताओं तो संबोधित किया और कहा- अगले रविवार को मैं झूठ बोलने वालों के ऊपर प्रवचन दूँगा। आप मेरी किताब सच और झूठ को पढ़कर आएँ। अगले रविवार को उपदेशक ने प्रवचन देना शुरू किया और श्रोताओं से पूछा कि आपमें से कितने लोग मेरी किताब का सत्रहवाँ अध्याय पढ़कर आए हैं। सभी ने अपने हाथ खड़े कर दिए। उपदेशक ने कहा कि मेरा यह प्रवचन आप जैसे लोगों के लिए ही है। दरअसल मेरी किताब में सत्रहवाँ अध्याय है ही नहीं।